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शहर के कुछ ऐसे इंजीनियर हैं, जिनके बनाई मशीनें बन गई मिसाल

7 वर्ष पहले
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(फोटो- तिघरा डैम)
ग्वालियर. देशभर की ज्यादातर टेक्सटाइल मिलों में डिजाइनिंग वर्क के लिए जिस मशीन का यूज हाेता है, उसे हमारे शहर के इंजीनियर ने डिजाइन की। कम्युनिकेशन में ऑप्टीकल का भी यूज किया जा सकता है, इसकी रिसर्च भी शहर मेें पढ़ाई कम्पलीट करने वाले इंजीनियर ने की। यह कुछ ऐसे उदाहरण हैं जिनकी बदौलत देशभर में हमारे इंजीनियर के बनाई मशीनरी से लेकर उनकी कार्यशैली सभी के लिए मिसाल बन गई। इंजीनियरिंग-डे के अवसर पर शहर के कुछ ऐसे ही इंजीनियर से सिटी भास्कर ने चर्चा की। इनका कहना है कि इंजीनियर का काम तकनीक के साथ दूरगामी सोच का होता है। इसलिए निरंतर कुछ नया करने प्रयास करने की बदौलत मुकाम हासिल किया है।
इंजीनियरिंग फोरम ने बनाया इंजीनियरिंग डे
इंजीनियरिंग फोरम ग्वालियर की ओर से रविवार को इंजीनियरिंग डे की पूर्व संध्या पर होटल रीजेंसी में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि और की-नोट स्पीकर आईआईटी दिल्ली के डायरेक्टर डॉ. आरके शेवगाओंकर और अध्यक्षता रिटायर्ड चीफ इंजीनियर केजीएस तोमर ने की। इस अवसर पर राधाकृष्ण खेतान, प्रभात भार्गव, रामराज सिंह राजावत सहित अन्य इंजीनियर मौजूद रहे।
ये हैं सिटी में इंजीनियरिंग के नायाब उदाहरण
महाराज बाड़ा: शहर का हृदयस्थल महाराज बाड़ा आर्किटेक्चर का अद‌भुत उदाहरण हैं। यहां सात बिल्डिंग हैं, जिनकी स्थापत्य शैली विश्वभर से ली गई है।
तिघरा डैम: शहर की लाइफलाइन तिघरा डैम को इंजी. विश्वसुरैया ने डिजाइन किया था। इसे सूखे की समस्या को देखते हुए सांक नदी पर बनाया गया ।
>गोरखी गेट- राजपूताना शैली
<डाकघर- इटेलियन शैली
>एसबीआई-रोमन-शैली
>विक्टोरिया मार्केट- विक्टोरिया
>गवर्नमेंट प्रेस- परशियन शैली
>टाउनहॉल- सउदी अरब शैली
आगे की स्लाइड्स में पढ़ें क्या कहा शहर के इंजीनियर्स ने