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व्यापार मेला: मेला 31 दिन, दुकानों का किराया 38 दिन का

7 वर्ष पहले
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ग्वालियर. ग्वालियर व्यापार मेला प्राधिकरण ने इस बार मेले की अवधि 38 दिन से घटाकर 31 दिन कर दी है, लेकिन दुकानदारों से मेला अवधि के नाम पर पूरे 38 दिन का किराया लिया है। गौरतलब है कि पिछले साल तक मेला एक जनवरी से सात फरवरी तक (38 दिन) लगता था। इस साल मेला 16 दिसंबर से 16 जनवरी तक (31 दिन) ही लगेगा। इसे लेकर व्यापारियों ने आपत्ति जाहिर की है।
शासन ने मेला शुरू होने की तारीख 16 दिसंबर तय की है लेकिन सुस्त कारोबारी गतिविधियों के कारण इस तारीख तक पूरा मेला शुरू होगा, ऐसे आसार कम ही हैं। अभी मेले के अधिकांश सेक्टर में स्टॉल बनना भी शुरू नहीं हुए हैं। जानकारों का कहना है कि एक स्टॉल तैयार करने और उसकी रंगाई-पुताई में काफी समय लगता है। जब एक साथ सभी स्टॉल तैयार किए जाते हैं तो लेबर की कमी भी होने लगती है।
पार्किंग के लिए चार स्थान तय
पुलिस ने मेले में पार्किंग के लिए चार स्थान तय किए हैं। गोले का मंदिर की ओर से आने वाले वाहन पशु मेला मैदान में पार्क हांेगे। स्टेशन बजरिया की ओर से आने वाले वाहन दुल्लपुर तिराहा के पास मैदान में, कुसुमाकर रंगमंच पार्किंग तथा मृगनयनी गार्डन के पीछे वाले मैदान में पार्क हांेगे। मुरार, सुरुचि होटल तथा यूनिवर्सिटी की ओर से आने वाले वाहनों के लिए इंद्रमणी नगर की ओर मेला ग्राउंड में नया पार्किंग स्थल तय किया गया है।
छूट को लेकर नहीं मिला सकारात्मक जवाब

ऑटोमोबाइल सेक्टर में छूट के संबंध में अधिकारियों से पूछताछ की थी लेकिन कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला। ऑटोमोबाइल कंपनियां भी छूट न मिलने पर व्यापार मेला में स्टॉल लगाने के पक्ष में नहीं हैं।'' हरीकांत समाधिया, अध्यक्ष, ग्वालियर ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन

मेला प्राधिकरण ने मेला अवधि घटाकर 31 दिन कर दी है लेकिन किराया 38 दिन का लिया है। इसलिए मेला पूरे 38 दिन लगना चाहिए। शासन ने इस साल मेले की शुरूआत जल्दी की है। हम लोगों ने स्टॉल बनवाना शुरू कर दिए हैं। प्रयास कर रहे हैं कि मेला अवधि में ही अपना स्टॉल शुरू कर सकें।'' नवीन माहेश्वरी, इलेक्ट्रानिक्स कारोबारी

हमारे प्रयास हैं कि शासन की ओर से तय की अवधि में 90 फीसदी दुकानें शुरू हो जाएं। दुकानदारों से मेला अवधि के नाम पर किराया लिया गया है। ऑटोमोबाइल सेक्टर को छूट दिए जाने के संबंध में काफी पहले पत्र व्यवहार किया गया था। इसका निर्णय राज्य सरकार को करना है।'' अरुण श्रीवास्तव, मेला सचिव