मुरैना. जिला अस्पताल में मंगलवार को प्रसूता को इलाज के लिए लेकर आए परिजन ने स्टाफ नर्सों के साथ झूमाझटकी कर दी। विवाद उस वक्त और गहरा गया जब सुमावली विधायक सत्यपाल सिंह सिकरवार भी मरीज के परिजन के समर्थन में अस्पताल पहुंच गए। यहां नर्सों व विधायक के बीच भी कहासुनी हुई।
इसके बाद अस्पताल के डॉक्टर व स्टाफ नर्सों ने काम बंद कर दिया। यहां तकरीबन तीन घंटे तक हंगामा चलता रहा। इधर डॉक्टर केे ओपीडी में न बैठने से मरीज परेशान होते रहे। मंगलवार को सुबह 8 बजे कंजी पत्नी गुल खान निवासी जरैना को एक दर्जन के करीब लोग अस्पताल में पेट दर्द की शिकायत लेकर आए। ग्रामीण महिला को लेकर अस्पताल के इमरजेंसी ड्यूटी रूम में हंगामा करने पहुंचे।
यहां ड्यूटी डॉक्टर बीएल मौर्य ने महिला का चेकअप किया और रेडक्रॉस के मेडिकल वार्ड में भेज दिया। यहां ड्यूटी पर कोई डॉक्टर नहीं था और मरीज के लिए पलंग भी खाली नहीं था। इससे मरीज के परिजन आक्रोशित हो गए और उन्होंने नर्सिंग स्टाफ के साथ झूमा-झटकी कर दी। झूमाझटकी से गुस्साई नर्सें भी इकट्ठी हो गईं।
मरीज के परिजन ने भी फोन करके सुमावली विधायक सत्यपाल सिंह सिकरवार को मौके पर बुला लिया। सुमावली विधायक ने जब डॉक्टरों व नर्सिंग स्टाफ को फटकार लगाई तो नर्सों ने एकजुट होकर उन्हें बताया कि मरीज के परिजन ने हमसे अभद्रता की है। लेकिन सुमावली विधायक ने डॉक्टरों की गलती मानते हुए जब स्टाफ को हड़काया तो गुस्साए डॉक्टरों व नर्सिंग स्टाफ ने काम बंद कर दिया। इधर विधायक भी समर्थकों सहित अस्पताल परिसर में ही धरने पर बैठ गए।
हंगामा की सूचना मिलते ही एडीएम विवेक सिंह, सीएमएचओ डॉ. जीएस राजपूत मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षाें को सुना लेकिन न तो सुमावली विधायक धरने से उठने को तैयार हुए और न ही स्टाफ नर्स काम पर लौटने को तैयार थीं।
धरने पर बैठे महिला मरीज के पति गुल खान व ग्रामीणों ने बताया कि नर्सें ड्यूटी रूम में
मोबाइलों पर व्यस्त थीं जबकि मरीज की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी और इलाज करने को कोई तैयार नहीं था। सुनवाई न होने पर विधायक सत्यपाल को बुलाना पड़ा तब कहीं जाकर इलाज मिल सका है। मरीज एक घंटे तक बेहोशी की हालत में बेंच पर पड़ी रही।
इस संबंध में मुरैना एडीएम विवेक सिंह का कहना है कि नर्सिंग स्टाफ से बात की गई है, लेकिन दूसरे पक्ष से बातचीत नहीं हो सकी है। वह महिला के साथ ग्वालियर इलाज के लिए चले गये। दोनों पक्षों को सुनने के बाद ही मामले में कोई निर्णय लिया जाएगा।