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राजीनामा नहीं किया तो मार दी गोली

9 वर्ष पहले
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ग्वालियर। मारपीट के मामले में राजीनामा न करने पर चाचा-भतीजे पर उनके दुश्मनों ने शुक्रवार को ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। सिर में गोली लगने से चाचा की मौत हो गई, जबकि भतीजे के कान को घायल करती हुई गोली निकल गई। हत्या की वारदात महाराजपुरा थाना क्षेत्र के पदमपुर गांव में शुक्रवार की शाम को हुई। वारदात के तीन घंटे बाद मृतक के परिजनों ने आरोपियों के घर पर पथराव कर दो वाहनों में तोड़फोड़ कर दी। तनाव के चलते गांव में पुलिस फोर्स तैनात किया गया है।
महाराजपुरा थाना क्षेत्र के पदमपुर गांव में रहने वाले लालसिंह (40) पुत्र हीरालाल लोधी का विवाद चार महीने पहले घर के सामने रहने वाले रामहेत लोधी से हो गया था। दोनों के बीच मारपीट हुई। इस मामले में लालसिंह ने महाराजपुरा थाने में मारपीट का मामला दर्ज करा दिया। रामहेत इस मामले में राजीनामा करने के लिए लालसिंह पर दबाव डाल रहा था। शुक्रवार को लालसिंह अपने भतीजे नरोत्तम के साथ खेत से घर लौट रहे थे।
वह घर के नजदीक पहुंचे ही थे, तभी रामहेत, राजवीर, बिहारी, मुकेश लोधी तथा इनके चार साथियों ने इन्हें घेरकर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। एक गोली लालसिंह के सिर में लगी और वह जमीन पर गिर पड़े। एक गोली नरोत्तम के कान को छूती हुई निकल गई, जिससे उसका कान लहूलुहान हो गया।
हमलावरों से बचकर नरोत्तम अपने घर पहुंचा और पुलिस को वारदात की सूचना दे दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घायल नरोत्तम से पूछताछ की और उसके बाद इलाज के लिए जयारोग्य अस्पताल भेज दिया। रात लगभग आठ बजे मृतक पक्ष के लोगों ने इकट्ठा होकर आरोपियों के घर पर पथराव कर दिया इससे एक एक ट्रैक्टर और जीप क्षतिग्रस्त हो गई।
पथराव की सूचना मिलते ही टीआई रवि सिंह चौहान पदमपुर पहुंच गए और यहां पर पुलिस फोर्स तैनात कर दिया गया। टीआई श्री चौहान के अनुसार रामहेत, राजवीर, बिहारी, मुकेश तथा इनके तीन-चार साथियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया है।
कान से खून टपकता रहा, पूछताछ होती रही
फायरिंग में घायल हुए नरोत्तम का कहना है कि मौके पर पहुंची पुलिस घायल अवस्था में उससे पूछताछ करती रही। उसके कान से खून टपक रहा था। वह इलाज करवाने के लिए बार-बार कहता रहा, लेकिन पुलिस ने उसका इलाज शुरू नहीं करवाया। नरोत्तम का कहना था कि दुश्मन राजीनामा करने के लिए दबाव डालने के साथ धमकियां भी दे रहे थे। शुक्रवार को दिन में केस की सुनवाई थी। वे सुनवाई के बाद गांव आए और फिर खेत पर चले गए थे। खेत से लौटते समय दुश्मनों ने हमला कर दिया।