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ग्लोबल वार्मिंग ने मलेरिया को बनाया और ज्यादा खतरनाक

6 वर्ष पहले
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(मलेरिया रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिक डा. डीमान)

ग्वालियर
। ग्लोबल वार्मिंग ने उन स्थानों का तामपान बढ़ा दिया है, जो पहले ठंडे इलाके थे। तापमान की इस वृद्धि ने मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों के पैरासाइड क्षमता कई गुना बढ़ा दी है। इसके अलावा वर्तमान में जो तामपान ऊपर-नीचे हो रहा है, उसके कारण मलेरिया वाले मच्छर फिर पनपने लगे हैं। यह जानकारी मलेरिया रिसर्च इंस्टीट्यूट के सीनियर वैज्ञानिक डा. आरसी डीमान ने दी।

डा. डीमान ग्वालियर आईटीएम यूनीवर्सिटी में आयोजित एक सेमीनार में हिस्सा लेने आए हुए थे। उन्होंने बताया कि तामपान में वृद्धि के चलते मच्छरों को पनपने के भरपूर मौका मिल रहा है। पहले ठंडे इलाकों में मच्छरों में मलेरिया व दूसरी बीमारियां फैलाने वाला पैरासाइट विकसित नहीं होता था, लेकिन अब स्थितियां बदल गई हैं। इसका कारण भी यही है कि पहले मच्छरों में पैरासाइट विकसित होने की अवधि 25 दिन होती थी और कड़ाके की ठंड में 45 दिन से ज्यादा का समय लग जाता था। अब यही पैरासाइट विकसित होने का समय कम होता जा रहा है।

दरअसल मच्छर में मलेरिया फैलाने के लिए दो प्रकार के पैरासाइट, बाइवैक्स व फाल्सीफेरम ही जिम्मेदार होते हैं। तामपान के गड़बड़ाने के कारण ही मच्छरों का प्रकोप दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है।
मच्छरों से होते हैं छह प्रकार के रोग
मच्छरों के कारण मलेरिया, डेंगू, फाइलेरिया, दिमागी बुखार, कालाजार व चिकनगुनिया जैसी बीमारियां फैलती हैं। इन मच्छरों को पनपने से रोकने के लिए उपाय करने चाहिए। मसलन घर के वॉश बेसिन, किचन की सिंक व फ्लावर पॉट में पानी एकत्र नहीं होने दें। इन स्थानों पर डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर तेजी से पनपता है।