ग्वालियर. एक माह की पोती को कुएं में फेंककर मारने वाले आरोपी दादा दुर्जन सिंह कुशवाह को जिला न्यायालय की एडीजे कोर्ट ने शुक्रवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। एडीजे देवराज बौहरे की कोर्ट ने दुर्जन को आईपीसी की धारा 302 के तहत दोषी माना है। साथ में 10 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है।
ग्वालियर निवासी दुर्जन सिंह ने छह दिसंबर 2013 को हस्तिनापुर थाने में रिपोर्ट लिखाई कि उसकी पोती ज्योति को कोई घर से उठा ले गया है। पुलिस को विवेचना के बाद जानकारी मिली कि ज्योति की हत्या घर के कुएं में ही फेंककर की गई है। इसके बाद पुलिस ने ज्योति के दादा दुर्जन सिंह व पिता रंजीत सिंह आदि के खिलाफ मामला दर्ज किया। कोर्ट ने मासूम ज्योति की हत्या के आरोप में दादा दुर्जन सिंह को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
देवी को पूजने वाला समाज कन्या जन्म को अभिशाप मानता है: कोर्ट
कोर्ट ने अपने आदेश में लिखा है कि जहां नारी की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते हैं। लेकिन यह केवल शास्त्रों में लिखे लेख तक ही सीमित रह गया है। जीवन की हर समस्या सुलझाने के लिए देवी की आराधना करने वाला भारतीय समाज कन्या जन्म को अभिशाप मानता है। दहेज के डर से हत्या जैसा घृणित कार्य करना कहां तक उचित है।