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दूसरी छात्राओं के स्थान पर मेडिकल प्रवेश परीक्षा देने वाली लेडी सॉल्वर गिरफ्त में

6 वर्ष पहले
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(एसआईटी की गिरफ्त में लेडी सॉल्वर स्वाति सिंह)

ग्वालियर। व्यापमं के एमबीबीएस घोटाले की जांच करने वाली एसआईटी ने एक ऐसी लेडी सॉल्वर को पकड़ने में सफलता हासिल की है, जिसने ग्वालियर की दो छात्राओं के स्थान पर पीएमटी की परीक्षा दी थी। यह महिला स्वयं भी एमबीबीएस की छात्रा है और वर्तमान में बनारस हिंदू यूनीवर्सिटी (बीएचयू) के मेडिकल कालेज पढ़ रही है।

इस बारे में एसआईटी से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि ग्वालियर में एक डीएसपी महिपाल सिंह यादव ने अपनी पुत्री मोनिका यादव को एमबीबीएस में प्रवेश कराने के लिए एक विजय सक्सेना नाम के युवक को छह लाख रुपए दिए थे। विजय भी डाक्टर है औऱ आगरा का निवासी है। एसआईटी उसे भी गिरफ्तार करके पहले ही ग्वालियर ले आई है। विजय ने एसआईटी को जानकारी दी कि उसने लेडी सॉल्वर का इंतजाम बीएचयू से किया था और उसका नाम स्वाति सिंह है। इस सूचना के आधार पर रविवार को एसआईटी स्वाति सिंह को ग्वालियर लेकर आ गई।
स्वाति सिंह भी बीएचयू में एमबीबीएस अंतिम वर्ष की छात्रा है और उसने बताया कि वह मोनिका यादव के अलावा प्रियंका श्रीवास्तव के स्थान पर पीएमटी की परीक्षा दे चुकी है। इन दोनों छात्राओं को एमबीबीएस में एडमिशन मिल गया था।
मेडिकल प्रवेश घोटाले के आरोपी की पत्नी है प्रियंका
एसआईटी मेडिकल प्रवेश घोटाले के बड़े आरोपी विशाल यादव को पहले ही पकड़ चुकी है और इस समय वह जेल में हैं। प्रियंका विशाल की पत्नी है और इसे 2010 में एमबीबीएस में प्रवेश दिलाया गया था, जबकि डीएसपी महिपाल सिंह की पुत्री मोनिका ने सॉल्वर के जलिए 2009 में प्रवेश लिया था।
शैलेन्द्र की टिप से पकड़ा गया था विजय
पुलिस ने कुछ समय पहले गजराराजा मेडिकल कॉलेज के छात्र शैलेंद्र निरंजन को गिरफ्तार किया था, इसने पूछताछ के दौरान बताया कि आगरा मेडिकल कॉलेज के 2008 बैच के छात्र विजय सक्सेना के जरिए डीएसपी महीपाल यादव की बेटी मोनिका के लिए सॉल्वर का इंतजाम किया था। शनिवार को विजय पुलिस के हाथ आ गया। पूछताछ के दौरान विजय सक्सेना ने बताया कि उसने शैलेंद्र निरंजन से साढ़े छह लाख रुपए सॉल्वर का इंतजाम करने के लिए थे। बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी केसंचालित मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाली अपनी दोस्त स्वाति से उसने इस बारे में बात की तो वह दोस्ती की खातिर इसके लिए राजी हो गई।

इसके बाद वह 2009 में मोनिका की जगह पेपर देने के लिए उसे लाया और 2010 में प्रियंका श्रीवास्तव के स्थान पर भी यही परीक्षा में बैठी थी। प्रियंका के लिए सॉल्वर का इंतजाम करने के लिए भी उसे साढ़े छह लाख रुपए मिले थे।