ग्वालियर. अदालत में चल रहा तेरह साल पहले हुई मारपीट का एक मामला शनिवार को आयोजित नेशनल लोक अदालत में मिनटों में सुलझ गया। मामले से जुड़े दोनों पक्षों ने शुक्रवार को प्रिंसिपल रजिस्ट्रार आरके गुप्ता के सामने पेश होकर प्रकरण सुलझाने की गुहार लगाई थी। उन्होंने दोनों पक्षों से बात की तो उनके बीच सहमति बनी और उसके बाद शनिवार को हाईकोर्ट की जस्टिस एसके पालो की खंडपीठ में दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया।
हाईकोर्ट में इस तरह के अन्य मामलों के साथ 974 प्रकरणों का निराकरण किया गया। इसमें मोटर दुर्घटना क्षतिपूर्ति मामलों में 498 पीड़ित पक्षकारों को चार करोड़ से अधिक की राशि दिलाई गई।
हाईकोर्ट में नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ प्रशासनिक न्यायमूर्ति एसके गंगेलेे ने किया। जिला न्यायालय में नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ जिला न्यायाधीश कमल सिंह ने किया। कलेक्टर पी. नरहरि ने 490 प्रकरण निपटाए।
विदिशा निवासी रामकृष्ण ने देवसिंह व अन्य के खिलाफ जुलाई 2001 में मारपीट का मामला दर्ज कराया था। जेएमएफसी कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद आरोपियों को 6-6 माह की सजा सुनाई थी। बाद में सेशन कोर्ट ने भी इसकी पुष्टि की।
तब देवीसिंह ने 2006 में हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में अपील की। तब से मामला लंबित था। नेशनल लोक अदालत के आयोजन की सूचना पर देवीसिंह ने प्रिंसिपल रजिस्ट्रार से संपर्क किया था। खंडपीठ के समक्ष दोनों पक्षों में हुए समझौते के बाद मामला सुलझ गया।
भाई ने किया समझौता तो जेल से छूटा प्रेम
ग्वालियर निवासी प्रेमनारायण ने अपने मौसेरे भाई राजेन्द्र पाराशर से पैसे उधार लिए थे। इसके एवज में 50-50 हजार के दो चेक दिए। चेक बाउंस होने पर राजेंद्र पाराशर ने 2013 में कोर्ट में मामला पेश किया। जेएमएफसी कोर्ट ने सुनवाई के बाद मार्च 2014 में प्रेमनारायण को 6 माह की सजा सुनाई। साथ ही 55 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया।
इसके खिलाफ सेशन कोर्ट में अपील की गई। सेशन कोर्ट ने भी उक्त आदेश की पुष्टि की। आरोपी की ओर से इसके खिलाफ हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में पुनर्रीक्षण याचिका पेश की गई थी। नेशनल लोक अदालत में अधिवक्ता रविंद्र दीक्षित के प्रयासों से दोनों भाइयों में समझौता हो गया। इसके बाद हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने उसकी रिहाई के आदेश जारी कर दिए।