(फाइल फोटो: एशियाई सिंह जिसका कूनों में विस्थापन प्रस्तावित है)
ग्वालियर। श्योपुर स्थित कूनो अभयारण्य में शेरों को लाने का रास्ता साफ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर कूनो अभयारण्य का दायरा बढ़ाने काम शुरू कर दिया गया है। वाइल्ड लाइफ के विशेषज्ञों पहले ही कूनो अभयारण्य को शेरों के लिए मुफीद करार दे चुके हैं। प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक अनिल ओबेराय ने BHASKAR.COM से चर्चा करते हुए जानकारी दी कि गिर से एशियाई शेरों को गिर लाए जाने की राह में अब कोई बाधा शेष नहीं है।
ओबेराय ने कहा कि गुजरात से शेर लाने का रास्ता साफ कर दिया गया है। जल्द ही गुजरात से शेर कूनो अभयारण्य में लाए जाएंगे। फिलहाल कूनो अभयारण्य में रणथंबोर से आया बाघ लंबे समय से नज़र आ रहा हैसाथ ही यहां तेंदुओं के पग-मार्क भी मिले हैं। ओबेराय के मुताबिकसुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद प्रदेश सरकार ने कूनो अभयारण्य का दायरा बढ़ाने की अनुमति भी दे दी है।
अफ्रीकी चीता को बसाने की भी है योजना
प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने बताया कि कूनो में अफ्रीकी चीता लाने के प्रोजेक्ट को भी हरी झंडी दी जा चुकी है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के सिंहों के गिर से जल्द विस्थापन के निर्देश पर वन विभाग ने फिलहाल इस परियोजना को अभी रोक लिया है। ओबेरायन ने बताया कि भारतीय वन्य जीव संस्थान के विशेषज्ञों पहले ही गिर के बाद पालपुर-कूनो के जंगलों को एशियाई सिंहों के रहने के लिए सबसे मुफीद क़रार दे चुके हैं। इसके पक्ष में विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि गिर में वन क्षेत्र सीमित है, लिहाजा शेरों की संख्या बढ़ाने के लिए अतिरिक्त क्षेत्र मुहैया कराना जरूरी है।
सिंहों के लिए भरपूर भोजन है कूनों के जंगलों में
कूनो के जंगलों को 1981 में वन्य जीव संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया था। हाल ही में इसमें नौ सौ वर्ग किमी वन क्षेत्र और जोड़ा गया है। अब यह क्षेत्र गिर के जंगलों से शेरों के विस्थापन और प्रजनन के लिए पूरी तरह उपयुक्त मान लिया गया है। इस जंगल में शेर के लिए शिकार के पर्याप्त जानवर हैं। इनमें नीलगाय, हिरण, लोमड़ी आदि शामिल हैं। इसके साथ ही तेंदुए जैसे शिकारी जीव भी हैं, जो सिंह के लिए शिकार के सहायक माने जाते हैं।