(फाइल फोटोः भगवान शिव)
ग्वालियर। शिवरात्रि का महापर्व इस बार 17 फरवरी को सुख-समृद्धि का संयोग लेकर आएगा। ज्योर्तिविदों की मानें तो मंगलवार को आ रही शिवरात्रि यूं तो मंगलकारी रहेगी ही। वहीं गुरु-शुक्र का उच्च राशि में होना शिव के भक्तों के लिए विशेष फल देने वाला रहेगा। साथ ही मानस योग एवं सर्वार्थ सिद्धि योग भी इस दिन रहने से महाशिवरात्रि पर शिव आराधना कई गुना फलदायक रहेगी। शिव चौदस का पर्व इस बार त्रयोदशी में शुरू होगा।
पंडित विजयभूषण वेदार्थी के मुताबिक उदयकाल में त्रयोदशी तिथि मंगलवार को दोपहर 12.36 बजे तक रहेगी। इसके बाद चतुर्दशी शुरू हो जाएगा, जो बुधवार को सुबह 9.02 बजे तक रहेगी। इसके बाद अमावस्या लग जाएगी। महाशिवरात्रि का व्रत चतुर्दशी की रात्रि में मनाना शास्त्र सम्मत होने के कारण मंगलवार 17 फरवरी को एक ही दिन शिव रात्रि पर्व मनेगा। इस दिन मानस योग की निष्पत्ति के साथ ही मंगलवार के प्रात: बेला में दोपहर 12.36 बजे तक सर्वार्थ सिद्धि योग भी रहेगा।
इस शिवरात्रि में गुरु ग्रह अपनी उच्च राशि में गजकेसरी योग में स्थित होने के साथ शुक्र ग्रह भी अपनी उच्च राशि में भ्रमण कर रहे होंगे। इसलिए इस दिन की गई शिव आराधना येहि लौ
किक एवं पारलौ
किक सुखों की प्राप्ति देने वाला होगा। ज्योतिषाचार्य पं. नरेंद्रनाथ पांडेय के अनुसार शिवरात्रि पर ध्वज योग, सर्वार्थ सिद्धि योग बनने के कारण मूल्य वृद्धि में गिरावट आएगी। फसल अच्छी होगी जिससे किसान खुशहाल रहेंगे।
चार प्रहर में चलेगी शिव पूजा
शिवजी की पूजा के लिए चार प्रहर में पूजा श्रेष्ठ फलदायी और मनोकामना पूर्ण करने वाली मानी गई है। चार प्रहर की पूजा के लिए ये रहेगा समय
प्रथम प्रहर : शाम 6.16 बजे से
दूसरा प्रहर : रात 9.29 बजे से
तीसरा प्रहर : अर्द्ध रात्रि 12.37 बजे से
चतुर्थ प्रहर : अर्द्ध रात्रि बाद 3.54 बजे से
ऐसे करें पूजन
शिवजी को प्रसन्न करने के लिए उपवास कर शुद्ध अवस्था में भगवान शिव का जल से अभिषेक करने के बाद दूध, दही, घी, शहद, शक्कर, पंचामृत से स्नान कराएं। इसके बाद जल से भिर भगवान शिवर को स्नान कराएं। तदुपरांत दुग्ध मिश्रित जल धारा से महाभिषेक कर वस्त्र, यज्ञोपवीत, चंदन, भस्म, अक्षत एवं अकौआ का फूल, कनेर, बेलपत्र, मोलश्री, धतूरा पुष्प,भांग अर्पित करना चाहिए।
महा शिवरात्रि इसलिए है श्रेष्ठ
प्रत्येक महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मास शिवरात्रि कहा जाता है। इन शिवरात्रियों में सबसे प्रमुख है फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी जिसे महाशिवरात्रि के नाम से जाना जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि महाशिवरात्रि की रात में देवी पार्वती और भगवान भोलेनाथ का विवाह हुआ था इसलिए यह शिवरात्रि वर्ष भर की शिवरात्रि से उत्तम है। ज्योतिष की दृष्टि से भी महाशिवरात्रि की रात्रि का बड़ा महत्व है।