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ट्रॉमा सेंटर को बेहतर बनाने के लिए बनाया रोस्टर प्लान, अधीक्षक से आपत्ति दर्ज कराई

7 वर्ष पहले
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ग्वालियर. जेएएच के ट्रॉमा सेंटर में 24 घंटे ड्यूटी देने से डॉक्टरों ने इनकार कर दिया है। ट्रॉमा सेंटर की व्यवस्थाएं सुधारने के लिए बनाए गए नये रोस्टर प्लान पर आपत्ति जताते हुए डॉक्टरों ने कहा है कि वे 24 घंटे ड्यूटी नहीं दे पाएंगे।
डॉक्टरों ने जीआरएमसी के डीन डॉ. जीएस पटेल और अधीक्षक डॉ. ज्योति बिंदल से मिलकर ट्राॅमा सेंटर में ड्यूटी करने पर आपत्ति दर्ज कराई। हालांकि डीन ने सभी डॉक्टरों को चेतावनी दी है कि रोस्टर प्लान में किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा। यदि आपको कोई आपत्ति है तो लिखकर दीजिए।

उधर डॉक्टरों का कहना है कि नया प्लान सीनियर डॉक्टरों के लिहाज से ठीक नहीं है। सीनियर डॉक्टर 24 घंटे और एक महीने तक बिना छुट्टी लिए लगातार ड्यूटी नहीं कर सकते। हालांकि डीन के सख्त रवैया को देखते हुए डॉक्टरों ने चुप्पी साध ली है। डॉक्टरों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन से चर्चा कर बीच का रास्ता निकाला जाएगा।

क्या है रोस्टर प्लान

गंभीर रूप से घायल मरीज के इलाज के लिए 24 घंटे ट्रॉमा सेंटर में न्यूरोसर्जरी, सर्जरी, मेडिकल, ऑर्थोपेडिक, ईएनटी के विशेषज्ञ रहेंगे। रोस्टर प्लान विभागवार तैयार किया गया है। इसके तहत विभाग का कोई भी विशेषज्ञ अपनी सेवाएं देगा।

घायलों के लिए तत्काल उपचार

ट्रॉमा का मतलब है, ऐसी चोट अथवा घाव-जो किसी हादसे, हथियार या गिरने- फिसलने से आई हो। इन ट्रॉमेटिक इंजुरी (विशेष प्रकार की चोट) से घायल की जिंदगी बचाने के लिए देशभर में ट्राॅमा केयर यूनिट्स की स्थापना की जा रही है। मेडिकल कॉलेज में लेवल-1 ट्रॉमा केयर यूनिट स्थापित की गई है। ट्रॉमा सेंटर में घायलों की सर्जरी व इलाज के जरूरी इंतजाम होते हैं, इसलिए ट्रॉमा केयर यूनिट्स बेहद जरूरी है।

घायलों को मिलेगा विशषज्ञों का लाभ : हादसे में घायल होकर आने वाले मरीज के लिए पहला एक घंटा गोल्डन आवर होता है। यदि इस अवधि में मरीज को इलाज मिल जाए तो उसकी जान बचाई जा सकती है। रोस्टर प्लान लागू होने पर गंभीर मरीज के ट्रॉमा सेंटर आने पर तुरंत उसे विशेषज्ञ की सेवाएं मिल सकेंगी।

ये भी है कारण: जेएएच के ज्यादातर डॉक्टर निजी अस्पतालों में भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ओपीडी टाइम के बाद यह डॉक्टर निजी अस्पतालों में अपना समय देते हैं। इसलिए डॉक्टरों ने ट्रामा में ड्यूटी करने से मना किया, क्योंकि यहां ड्यूटी करने पर 24 घंटे ऑन कॉल रहना पड़ेगा। इससे निजी अस्पताल में सेवाएं देने में उन्हें कठिनाई होगी।