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पीएमटी घोटाले में हो चुका है डॉक्टर का मर्डर

8 वर्ष पहले
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ग्वालियर. प्रदेश में इस समय चर्चित पीएमटी घोटाले का खुलासा ग्वालियर में 1992 में ही हो चुका था। उस समय पेपर आउट कराने पर जेएएच के एनाटॉमी विभाग के डॉ. जीपीएस गौर व प्रशासनिक अधिकारी डॉ. शाक्य को जेल भेजा गया था। डॉ. गौर के साथ उनका करीबी छात्र डॉ. जगदीश सगर (फिलहाल इंदौर जेल में बंद) रहता था। डॉ. गौर की 1994-95 में मालनपुर के पास हत्या हो गई।
हत्या के आरोपियों ने पुलिस को बताया था कि उनका पीएमटी पेपर आउट कराने और टोल टैक्स बेरियर के पैमेंट को लेकर डॉ. गौर से विवाद चल रहा था। शुरुआती सालों में रैकेट दो लाख रुपए लेकर टेस्ट के दौरान परीक्षार्थी के आस-पास मेडिकल स्टूडेंट या युवा डॉक्टर की सिटिंग कराकर उसे पेपर सॉल्व करवाता था।
ऐसे अपग्रेड होता गया फर्जीवाड़ा
1991 में सहयोगी छात्र को टेस्ट में बैठाने के साथ ही पेपर आउट कराया जाता था। 199४-9५ में डॉ. गौर की हत्या के बाद डॉ. सगर ने व्यापमं में संपर्क बढ़ाए और पेपर आउट कराने लगा। पेपर खरीदने के इच्छुक छात्र कोचिंग्स से ढूंढे जाते थे। इसमें कुछ कोचिंग संचालक भी शामिल थे।
डॉ.सगर के साथ ही एक अन्य युवक भी इस रैकेट में जुड़ गया। शादी के बाद इसकी पुलिस अधिकारियों से रिश्तेदारी हुई, जिसका रैकेट ने फायदा उठाया। पेपर आउट कराने में जब परेशानी हुई तो दूसरे राज्यों से लाकर फर्जी छात्रों को टेस्ट में बैठाया जाने लगा। रैकेट एमबीबीएस और पीजी परीक्षाओं में भी छात्रों को फर्जी तरीके से पास करता था।