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डाउनलोड करेंग्वालियर. पीएमटी फर्जीवाड़े में आरोपी छात्रों के दस्तावेज गायब करने वाले चिकित्सा शिक्षा विभाग व व्यापमं के कर्मचारी पुलिस कार्रवाई से बचे हुए हैं। इनके खिलाफ साक्ष्य मिटाने व आईपीसी धारा 406, 420 व 380 के तहत केस बनता है। इन्हें गिरफ्तार कर पूछताछ किए जाने से फर्जी डॉक्टर बनाने वाले एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश हो सकता है। फर्जी मेडिकल छात्र व डॉक्टरों में ग्वालियर में पदस्थ दो डीएसपी व एक डीजी रैंक के अफसर के रिश्तेदार और नजदीकी भी शामिल हैं।
एक बड़े रैकेट को बचाने के लिए आला पुलिस अफसरों की शह से मेडिकोज का रिकॉर्ड गायब किया गया है। इस काम को अंजाम देने वाले अफसरों व कर्मचारियों के खिलाफ न तो प्रकरण दर्ज किया और न ही किसी प्रकार की पूछताछ। दस्तावेज गायब करने वाले कर्मचारी पकड़े जाने पर वे नाम खोल सकते हैं, जिन्होंने उनसे रिकॉर्ड गायब कराया। रिकॉर्ड गायब कराने वाले अफसर-कर्मचारियों ने इंस्पेक्टर से लेकर डीजी रैंक के अफसरों तक के बेटे-बेटियों व नजदीकियों को पीएमटी में पास कराया है और बाद में एमबीबीएस की परीक्षाएं पास कराने में भी मदद की है।
छात्रों के दस्तावेज नहीं मिले
॥फर्जी मेडिकल छात्रों के प्रकरण में एक दर्जन से अधिक छात्रों के दस्तावेज नहीं मिले हैं। इसके लिए कई पत्र लिखे, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब व दस्तावेज नहीं दिए गए।-जोरसिंह भदौरिया, सीएसपी
जिम्मेदार को सह आरोपी बनाया जाना चाहिए
॥किसी भी आपराधिक प्रकरण में यदि महत्वपूर्ण दस्तावेज जानबूझकर गायब किए जाते हैं या उनमें कोई कूटरचना की जाती है, तो ऐसा करने वाले जिम्मेदार के खिलाफ आईपीसी के तहत प्रकरण दर्ज कर उन्हें सह आरोपी बनाया जाना चाहिए।-एसएस शुक्ला, रिटा. एडीजी
रिकार्ड गायब करना अपराध
॥पीएमटी कांड के हाई प्रोफाइल मामले की अलग-अलग जांच कराने से निष्पक्षता पर सवालिया निशान लगता है। मंशा सही होती तो इसे सीबीआई को सौंपा जा सकता था। प्रकरण की जांच में दस्तावेज महत्वपूर्ण हैं, उन्हें नष्ट करना गंभीर अपराध है। रिकॉर्ड गायब करने वालों पर साक्ष्य मिटाने व आईपीसी के तहत कार्रवाई की जाए तो काफी नए खुलासे सामने आ सकते हैं।- मुकेश गुप्ता, वरिष्ठ अभिभाषक
सरगना को बचाने मोहरे को बनाया मास्टरमाइंड
पुलिस ने हाल ही में पकड़े विशाल यादव को पीएमटी कांड का मास्टरमाइंड घोषित कर दिया, जबकि मेडिकल कॉलेज से लेकर पुलिस अफसर तक असली मास्टर माइंड का नाम जानते हैं। विशाल उस मास्टर माइंड के साथ रहा है। बताया गया है कि इस कांड में जगदीश सगर के बाद दूसरे नंबर के सरगना को बचाने के लिए पुलिस मोहरे के रूप में विशाल को मास्टर माइंड घोषित कर रही है। बताया यह भी गया है कि विशाल के पकड़े जाने के बाद शनिवार को एक पुलिस अधिकारी के साथ असली मास्टर माइंड के नजदीकी की बैठक भी हो चुकी है।
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