ग्वालियर. अंचल में दो पुलिसकर्मियों और तीन कारोबारियों की हत्या कर आतंक कायम करने वाले तीस हजार के इनामी बदमाश शेरा उर्फ रवि किरार को पुलिस ने शुक्रवार की सुबह महाराजपुरा इलाके में मुरैना-झांसी हाईवे पर एनकाउंटर में ढेर कर दिया। शेरा अपने एक साथी के साथ शहर से निकलने की फिराक में था। तभी इसका सामना पुलिस से हो गया। पुलिस और इसके बीच लगभग बीस मिनट फायरिंग हुई।
इस दौरान पुलिस की 12 गोलियां इसके शरीर में धंस गईं। इसका साथी कट्टे से गोलियां चलाता हुआ भाग गया। शेरा के कब्जे से पुलिस को 32 बोर की पिस्टल, तीन मैगजीन, साढ़े आठ हजार रुपए और मुरैना के एक वकील व भोपाल के एक पत्रकार का विजिटिंग कार्ड मिला है।
गौरतलब है कि इससे पहले 7 दिसंबर की रात शेरा के दो साथी विक्की वाल्मीकि और सोनू नागर भी एनकाउंटर में मारे गए थे। इसके बाद से ही पुलिस गिरोह के सरगना शेरा को तलाश रही थी। इसी दौरान शेरा ने जौरा में पेट्रोल पंप संचालक गिर्राज अग्रवाल की हत्या कर दी। इसके बाद ग्वालियर और मुरैना पुलिस शेरा की घेराबंदी में लग गई थी।
7 दिन, 80 गांव, 50 लोगों पर नजर, तब मिला शेरा
शेरा का खात्मा करने में पुलिस को अचानक सफलता नहीं मिली। इसके लिए पुलिस ने पिछले सात दिन में भिंड, मुरैना, श्योपुर, शिवपुरी, आगरा, धौलपुर, सवाई माधौपुर और भरतपुर के 80 गांव की खाक छानी। शेरा ने पिछले सात दिन से अपना
मोबाइल बंद कर रखा था। पुलिस ने इससे जुड़े लगभग 50 लोगों पर नजर रखी। तब शेरा का सुराग मिल सका।
पुलिस ने 2 दिसंबर को सागरताल रोड पर शेरा के दो साथी विक्की और सोनू को मार गिराया था। इनकी घेराबंदी के दौरान पुलिस को पता चला था कि गिरोह का सरगना शेरा किरार है। यह बड़े कारोबारियों को मारकर खौफ कायम करना चाहता है। पुलिस के अत्याधुनिक हथियार भी इसके टारगेट पर हैं। इसके बाद पुलिस ने इसकी घेराबंदी शुरू कर दी। इस बीच इसने जौरा में पेट्रोल पंप संचालक गिर्राज अग्रवाल की हत्या कर दी। इसके बाद पुलिस के सामने चुनौती थी कि शेरा को अन्य वारदात करने से रोका जाए।
ग्वालियर और मुरैना पुलिस ने अपने सारे संसाधन शेरा की तलाश में झोंक दिए। शेरा की लोकेशन मुरैना के आसपास मिल रही थी। इसके बावजूद ग्वालियर पुलिस की क्राइम ब्रांच और कुछ चुनिंदा पुलिसकर्मी मुरैना में शेरा को तलाशते रहे। शेरा के संपर्कों की जानकारी शिवपुरी, श्योपुर, धौलपुर, आगरा, सवाई माधौपुर, भरतपुर के कुछ गांवों में मिली थी।
आगरा में शेरा की बहन की ससुराल थी इसके अलावा कुछ और रिश्तेदार भी यहां रहते थे। पुलिस ने ऐसे पचास लोगों को चिह्नित किया जिनसे शेरा संपर्क कर सकता था या पहले संपर्क में रहा था। एक सप्ताह तक खुफिया तरीके से इन लोगों की निगरानी की गई। तभी शुक्रवार की सुबह पुलिस को पता चला कि शेरा नूराबाद के नजदीक स्थित खरगापुर-भर्राड़ से बाइक पर सवार होकर निकला है। बस यह सूचना पुलिस के लिए काफी थी, इसके बाद पुलिस ने घेराबंदी की और उसका खात्मा कर दिया।
खौफनाक शेरा
शेरा ने 2008 में अपराध जगत में प्रवेश किया था। लेकिन खौफनाक पिछले चार महीनोें में हुआ था। इस दौरान इसने दस वारदातों को अंजाम दिया। इसके खौफ से पुलिस हथियारबंद होकर चेकिंग करने लगी और मुरैना में दुकानें जल्दी बंद होने लगी। मुरैना के सिविल लाइन क्षेत्र में इसने लूट की पहली वारदात की थी। 2009 में यह मुरैना में कट्टे के साथ पकड़ा गया। 2009 में लूट और 2010 में इसने मारपीट की वारदात को अंजाम दिया। 2014 में सितंबर महीने में यह जेल से बाहर आया और इसके बाद ताबड़तोड़ वारदात को अंजाम देना शुरू कर दिया। 16 सितंबर को इसने मुरैना में लूट की वारदात को अंजाम दिया।
12 नवंबर को महाराजपुरा के दीनदयाल नगर में सिपाही वीकेश गुर्जर की हत्या कर पिस्टल लूट ली। इसके बाद नेपरी, मुरैना में ईंट भट्टा कारोबारी राजौरिया की हत्या, जनकगंज इलाके में लूट की तीन वारदातें, बहोड़ापुर में लूट की एक वारदात को अंजाम दिया। इसके बाद बहोड़ापुर के शब्दप्रताप आश्रम पर एएसआई आरके गौतम की हत्या कर पिस्टल लूट ली और दो कारोबारियों को गोली मार दी थी। इन वारदात के बाद शेरा ने जौरा में पेट्रोल पंप कारोबारी गिर्राज अग्रवाल की हत्या कर दी थी।
अंचल का डॉन बनने की थी चाहत
शेरा ग्वालियर और चंबल इलाके में ही अपना आतंक फैलाना चाहता था। इसलिए पुलिस की जबर्दस्त दबिश के बावजूद इसने क्षेत्र नहीं छोड़ा। 9 दिसंबर को पेट्रोल पंप मालिक गिर्राज अग्रवाल की हत्या करने के बाद यह अपने गांव पहुंचा था। इसके पास लगभग एक सैकड़ा कारतूस और तीन पिस्टल थीं। गांव में इसने अपने परिचितों से कहा था कि उसके टारगेट पर अब मुरैना का सबसे बड़ा कारोबारी और बदमाश है। पुलिस जब इसे आगरा और धौलपुर तक तलाश कर रही थी तब यह गुरुवार की रात को नूराबाद के नजदीक खरगपुर-भर्राड़ गांव में सोया और शुक्रवार की सुबह गांव से निकलकर ग्वालियर होते हुए झांसी की ओर जा रहा था। तभी पुलिस के जाल में फंस गया।
शूट आउट एट लाेखंडवाला के माया की तरह जीना चाहता था: शेरा फिल्म शूट आउट एट लोखंडवाला के बदमाश माया की तरह जीना चाहता था ताकि उसके नाम से लोग दहशत में रहें। फिल्म में माया पहले बड़े बदमाशों के लिए काम करता था। फिर वह सोचने लगा कि इतना काम अपने नाम से करे तो उसका नाम पहचाना जाएगा। बस यहीं से उसने ताबड़तोड़ वारदातों को अंजाम देना शुरू कर दिया। ठीक इसी लाइन पर शेरा चल रहा था। 2010 तक यह बड़े बदमाशों के लिए छोटी-छोटी वारदातें करता रहा। सितंबर 2014 में जेल से निकला तो इसने अपने दोस्तों से कहा कि वह अब माया की तरह जीएगा। इसके बाद उसने चार महीने में दस वारदात कीं।
सिपाही की पिस्टल की तलाश
पुलिस का अगला टारगेट अब शेरा के चार साथी हैं। इसके अलावा सिपाही वीकेश गुर्जर की पिस्टल बरामद करना और इसके आश्रयदाताओं को पकड़ने पर भी पुलिस का फोकस है। शहर में शेरा ने दीनदयाल नगर, सिकंदर कंपू, गोल पहाड़िया और हजीरा पर आश्रय लिया था।
ये रहे एनकाउंटर टीम में शामिल
शेरा का खात्मा करने में एसएसपी संतोष कुमार सिंह और एएसपी क्राइम ब्रांच प्रतिमा मैथ्यू के अलावा क्राइम ब्रांच के एसआई रिपुदमन सिंह, सुदेश तिवारी, एएसआई संतोष भदौरिया, सिपाही राजेश सिंह गुर्जर, घनश्याम जाट, रामसहाय गुर्जर, जितेंद्र सिंह, अंजनी सिंह, अशोक भदौरिया, जयराम सिंह, विकास, बबलू शाह, केशांत, अनिल सिंह, धर्मेंद्र तोमर, लोकेंद्र सिंह, अजय शर्मा, लोकेंद्र राणा, हरेंद्र गुर्जर, राकेश गुर्जर, राजकुमार और शिवराम सिंह शामिल रहे।
दबाव में ही काम कर पाती है पुलिस
दबाव में काम करना मुश्किल होता है लेकिन ग्वालियर की पुलिस दबाव में ही अच्छे परिणाम दे पाती है। पुराने कई ऐसे मामले हैं जिनमें पुलिस पर दबाब नहीं रहा और यह मामले अब तक अनसुलझे ही रहे हैं लेकिन जिन मामलों में पुलिस के ऊपर दबाव रहा उनमें पुलिस ने जल्द ही बेहतर परिणाम भी दिया।
पुलिस पर दबाव नहीं बनने पर अनसुलझे रह गए यह मामले
दस साल पहले झांसी रोड थाना क्षेत्र में हुआ राजकुमार भागचंदानी हत्याकांड।
पांच साल पहले इंदरगंज थानांतर्गत आदर्श कॉलोनी में कारोबारी चंदर मिगलानी की हत्या का मामला।
तीन साल पहले गोला का मंदिर पर चार लाख की लूट का मामला।
तीन साल पहले सांई बाबा मंदिर के पास रहने वाली महिला के घर हुई लूट का मामला।
पड़ाव इलाके में आरटीओ कर्मचारियों से पांच लाख रुपए की लूट।
जुलाई माह में हुआ संजीव बंसल हत्याकांड।
दबाव बना तो सुलझ गए मामले
हरेंद्र राणा, समीर जाट जैसे गैंगस्टर को पकड़ने के लिए पुलिस पर दबाव बना तो समीर जाट को मार गिराया और हरेंद्र राणा को गिरफ्तार कर लिया।
एक साल पहले पड़ाव से पेट्रोल पंप कारोबारी के बेटे कुशाग्र के अपहरण के मामले में कुशाग्र को मुक्त कराया और फिरौती भी वसूल कर ली।
पुलिस ने यह सीखा भी
शेरा के पुलिसकर्मियों पर हमले और इसके बावजूद बच जाने की वारदातों के बाद पुलिस ने भी कुछ सीखें इन घटनाक्रमों से ली हैं।
हथियारों को रखने में क्या सावधानी बरतना है और हमला होने पर इनका उपयोग।
छोटी-छोटी वारदातें करने वाले बदमाशों की घेराबंदी जितनी जल्दी हो सके कर लेंं।
आसपास के जिलों के बदमाशों की कार्यशैली और उनके मूवमेंट के बारे में भी अपडेट रहना और इन जिलों से समन्वय बनाए रखना।
दो शरणदाता भी हिरासत में
पुलिस ने शेरा किरार को गुरुवार की रात को शरण देने वाले दो लोगों को हिरासत में लिया है, इसने पूछताछ की जा रही है। इसके अलावा महाराजपुरा इलाके मे रहने वाले शेरा की मदद करने वाले एक और युवक को पकड़ा है।
शेरा ने पुलिस से बचने के लिए पल्सर बाइक को छोड़कर कम सीसी वाली हीरो
होंडा बाइक का उपयोग किया था। पुलिस पल्सर की तलाशी कर रही थी और वह हीरो होंडा से बचकर निकलना चाहता था।
आगे की स्लाइड्स में देखिए घटना की फोटो।