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दुकानदारों को त्योहार पर जमीन का तोहफा, परिषद में तीन साल बाद निर्णय

7 वर्ष पहले
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ग्वालियर. तीन साल पहले अतिक्रमण विरोधी मुहिम के तहत तोड़ी गईं दुकानें और कंपू फुटपाथ से हटाए गए फुटपाथियों सहित लगभग सवा चार सौ व्यापारियों को त्योहार से पहले व्यवसाय के लिए स्थान आवंटित किए जाएंगे।
इनमें से 22 दुकानदारों को हजीरा पर तोड़े गए मार्केट की भूमि पर, कंपू से हटाए गए फुटपाथियों को हॉकर्स जोन में तथा अतिक्रमण विरोधी मुहिम के पीड़ित दुकानदारों को नए विक्टोरिया मार्केट के पास खाली हिस्से में स्थान दिया जाएगा। यह निर्णय सोमवार को परिषद की बैठक में लिया गया।
व्यापारियों के स्थान आवंटन मामले को लेकर सत्ता और विपक्ष के पार्षदों का कहना था कि त्योहार का सीजन शुरू हो गया है। ऐसे में दुकानों के आवंटन में देरी न की जाए। इस पर सभापति बृजेंद्र सिंह जादौन ने निगम कमिश्नर अजय गुप्ता को आदेश दिए कि कंपू और हजीरा के व्यवसायियों को तीन दिन में स्थान आवंटन की प्रक्रिया शुरू कर शीघ्रता से आवंटन का काम पूरा करें।
इसके साथ ही तोड़फोड़ का शिकार हुए 206 व्यवसायियों को विक्टोरिया मार्केट के पिछले हिस्से में स्थान आवंटन करने के लिए उक्त भूमि पर किस साइज की कितनी दुकानें बन पाएंगी? इसका नक्शा तैयार कर लिया जाए। उसके तत्काल बाद स्थान आवंटन की प्रक्रिया शुरू करें।
फिर से हुआ दैवेभो के नियमितीकरण का निर्णय: निगम के दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण का निर्णय सोमवार को परिषद में एक बार फिर हुआ। 15 सितंबर की बैठक में भी परिषद ने ऐसा निर्णय लिया था।
इसमें एक जनवरी 2012 से पहले से काम कर रहे कर्मचारियों को नियमित किया जाएगा। शासन से स्वीकृति मिलने तक इनको न्यूनतम वेतनमान का लाभ देने का भी निर्णय लिया गया है। ऐसे कर्मचारियों की संख्या 1285 है। बैठक के दौरान दैवेभो कर्मचारी भी परिषद कक्ष व जलविहार परिसर में मौजूद रहे।
पार्षद बोलीं- जो काम निगम निधि से अवैध है, वह मौलिक निधि से वैध कैसे होगा?
पार्षद खुशबू गुप्ता ने बैठक के दौरान लेखाधिकारी के रवैये को लेकर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि लेखाधिकारी को यह अधिकार नहीं है कि वे सीधे पार्षद को पत्र लिखें। उन्होंने बताया कि पुराने वीडियो कोच बस स्टैंड से मेस्कॉट हॉस्पिटल तिराहे तक की रोड पर छह आर्नामेंटल बेंच लगाने का मामला था।
एक बेंच की कीमत 30 हजार रुपए थी। इस मामले में लेखाधिकारी ने मुझे एक पत्र लिखा। पत्र के अनुसार उक्त आयटम शेड्यूल ऑफ रेट में शामिल न होने के कारण इसे निगम निधि से नहीं लगवाया जा सकता, मौलिक निधि से लगाना होगा। श्रीमती गुप्ता की नाराजगी यह भी थी कि जब कोई काम निगम निधि से वैध नहीं है तो मौलिक निधि से कैसे वैध हो जाएगा? उन्होंने कहा कि आखिर दोनों ही निधियों में पैसा तो जनता का ही है।