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ये आदिवासी महिला है गांव की RJ, राजनीति में भी आजमा चुकी है हाथ

6 वर्ष पहले
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ग्वालियर. 107.8 मेगा हर्ट्स पर आप सुन रहे हैं रेडियो धड़कन.... नमस्कार मैं रामवती हूं रेडियो धड़कन से म्हारो श्रोता भईयांओ और म्हारी बहनों...म्हारे जाने का भी वक्त हो चुको है। जो भईया मुझे इजाजत दे दिजिए। बोले तो नमस्कार। कभी-कभी शहर में रहने वाले भी इस लहजे में बात करते हैं, लेकिन ये है एक छोटे से गांव की आदिवासी महिला रामवती। जो पांच गांव के लिए अपनी आवाज देती हैं। आज वर्ल्ड रेडियो डे है इस मौके पर हम आपको बता रहे हैं एक आदिवासी महिला के बारे में कैसे वह रेडियो से लोगों के दिलों की धड़कन बन गईं।
रामवती पटारा गांव में रहती हैं, जो मध्यप्रदेश में पड़ता है। वो 6 साल से रेडियो धड़कन से जुड़ी हुई हैं। रामवती रेडियो जॉकी के साथ-साथ फील्ड रिपोर्टर भी हैं। वो 5 गांव का पैदल सफर करती हैं। आदिवासी भाषा में लोगों से मजदूरी से लेकर उनके दर्द बांटती हैं। गांव के लोग कैसे खाते हैं, कैसे रहते हैं और कैसे कमाते हैं। इसकी भी पूरी जानकारी लेती हैं, जिसके बाद वो उन लोगों पर प्रोग्राम बनाती हैं। जो पूरे 5 गांव तक पहुंचता है।
रेडियो से आया गांव में बदलाव
रामवती ने आदिवासी भाषा को अपना हथियार बनाया और लोगों से जुड़कर गांव में बदलाव लाने की जिद छेड़ी। रामवती ने गांव के लोगों को शहरों के बारे में जानकारी दी। बच्चों को स्कूल जाने का महत्व बताया, जिससे गांव के लोगों में काफी बदलाव आया। रामवती गांव-गांव पहुंचकर, लोगों का झुंड बनाकर उनको साफ-सफाई करने के लिए जागरुक करती हैं। जिससे लोगों में साफ-सफाई के लिए उत्साह भी बढ़ा।
चुनाव में भी खड़ी हो चुकी हैं रामवती
रेडियो से जुड़ने के बाद रामवती चुनाव के लिए भी खड़ी हुई थीं। वो जिला पार्षद (25 पंचायत से मिलकर) के लिए खड़ी हुई थीं। लेकिन रेडियो का ऐसा जुनून चढ़ा कि उन्होंने चुनाव में लड़ने का मन त्याग दिया और फील्ड रिपोर्टिंग जारी रखी। रामवती हमेशा अपने पास रेडियो रखती है और लोगों को सुनाती हैं। 5 गांव में रामवती इतनी लोकप्रिय हो चुकी हैं कि जहां वो जाती हैं। लोग उनके पास आकर खड़े हो जाते हैं और उनको सुनना पसंद करते हैं।
आगे की स्लाइड्स में देखें रामवती की कुछ तस्वीरें....