पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

रतनगढ़ हादसा: व्यवस्था में एसडीएम और एसडीओपी से हुई चूक

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

ग्वालियर. बसई मलक व मरसैनी पर वाहनों को रोकने के लिए बैरिकेट नहीं लगाए गए। यदि बैरिकेट लगाए जाते और वाहनों को पुल पर नहीं आने दिया जाता तो मार्ग संकरा नहीं होता। इसकी जिम्मेदारी संबंधित एसडीओपी व एसडीएम की है। इस तरह की रिपोर्ट मैंने और संभागीय कमिश्नर ने संयुक्त रूप से शासन को भेजी थी। यह बयान पुलिस महानिरीक्षक चंबल एसएम अफजल ने सोमवार को न्यायिक जांच आयोग के समक्ष दिया। शासन ने इस हादसे की जांच के लिए न्यायिक जांच आयोग का गठन किया। आयोग के अध्यक्ष जस्टिस राकेश सक्सेना व सचिव एडीजे संजय चतुर्वेदी इस मामले की जांच कर रहे हैं।

आईजी चंबल ने कहा कि उन्हें लोगों ने बताया कि पुल टूटने की अफवाह से भगदड़ मच गई। उधर तत्कालीन तहसीलदार केडी शर्मा ने न्यायिक जांच आयोग के समक्ष आवेदन दिया है कि उनके ऊपर गलत तरीके से जिम्मेदारी डाली जा रही है, क्योंकि उनका स्थानांतरण हो गया था। रतनगढ़ हादसे के संबंध में कलेक्टर व एसडीएम ने जो शपथपत्र पेश किए हैं,उस पर वह जिरह करना चाहते हैं। सोमवार को आयोग के सामने एडीशनल एसपी जयवीर सिंह ने भी गवाही दी।