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यहां रोटरी और ट्रैफिक सिग्नल दोनों बन गए तो क्या हाल होगा

8 वर्ष पहले
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ग्वालियर. माधवनगर-चेतकपुरी चौराहे पर ट्रैफिक सिग्नल और रोटरी दोनों बनाए जा रहे हैं। नगर निगम इसके जरिए यहां का ट्रैफिक सुधारना चाहता है, लेकिन ट्रैफिक प्रबंधन से जुड़े लोग बताते हैं कि यहां पर अगर ये दोनों बना दिए गए तो ट्रैफिक का हाल-बेहाल हो जाएगा। यही नहीं हादसे की आशंका भी बढ़ेगी। फिलहाल, रोटरी बनाने को लेकर आला अफसर इस स्थान का निरीक्षण कर चुके हैं।

शहर में ट्रैफिक कैसे सुधारा जाए, इसको लेकर पुलिस और प्रशासन के अफसरों में पिछले एक साल से मंथन चल रहा है। जब भी आला अफसरों की बैठक होती है तो मुद्दा ट्रैफिक ही होता है, लेकिन जब अफसर सड़क पर ट्रैफिक सुधारने के लिए जाते थे तो उनके साथ ट्रैफिक इंजीनियरिंग जानने वाले लोग नहीं होते थे। नतीजा जहां जो अच्छा लगा, वहां पर वह काम करवाना शुरू कर दिया। इसके चलते ही माधव नगर-चेतकपुरी चौराहे पर रोटरी बनाने के साथ ट्रैफिक सिग्नल लगाने की बात तय कर ली गई।

सलाह इंजीनियरों ने ही दी होगी
ट्रैफिक इंजीनियरिंग के हिसाब से रोटरी और सिग्नल एक साथ नहीं होना चाहिए। माधवनगर चेतकपुरी चौराहे पर दोनों लगाने का निर्णय लिया है, इसकी क्या वजह है कितना फायदा होगा। इसकी सलाह इंजीनियरों ने ही दी होगी।
अजय त्रिपाठी, डीएसपी, ट्रैफिक

इस चौराहे पर अकेली रोटरी से काम चल सकता है फिर ट्रैफिक सिग्नल क्यों लगा रहे हैं पता नहीं। इससे तो ट्रैफिक जाम ज्यादा होने लगेगा।
राजेश गुर्जर,ऑटो ड्राइवर

वाहन चालकों को सामने से नहीं दिखेगा

: ट्रैफिक सिग्नल व रोटरी दोनों होने पर वाहन चालकों को सामने की ओर का दिखाई नहीं देगा। इससे हादसे की आशंका रहेगी।

: ट्रैफिक सिग्नल में सिग्नल होने का पहला सेकंड सबसे खतरनाक होता है। सिग्नल ग्रीन होने पर वाहन रफ्तार पकड़ते हैं और सिग्नल रेड होने पर वाहन अचानक रुकते हैं, ऐसे में वाहनों के चलने और रुकने पर रोटरी की वजह से वाहन चालकों को देखने में परेशानी होगी और हादसे के साथ-साथ ट्रैफिक जाम के हालात बन जाएंगे।


यह चौराहा नहीं, नगर निगम की प्रयोगशाला है
:माधवनगर-चेतकपुरी चौराहा वाहन चालकों के लिए चौराहा होगा, लेकिन नगर निगम के लिए तो यह प्रयोगशाला ही है। यहां पर पिछले एक साल में कई प्रयोग किए गए हैं, लेकिन इनके बाद भी ट्रैफिक सुधरने के बजाय बिगड़ा ही है।
: एजी ऑफिस पुल की ढलान से लेकर चौराहे के आगे तक डिवाइडर बना दिया गया था। इसकी वजह से बुजुर्ग लोगों को सड़क पार करने में परेशानी होने लगी। इसे हटाने के लिए स्थानीय लोगों ने मांग की थी।
: इसके बाद जब वाहन चालक इस डिवाइडर के लिए अभ्यस्त हो गए तो अचानक इसे हटा दिया गया।
: इसके बाद यहां पर ट्रैफिक सिग्नल लगाने की बात तय हुई। कुछ दिन बाद तय किया गया कि यहां पर रोटरी भी होनी चाहिए।