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आरोपी इंजीनियर की गिरफ्तारी के लिए निगमायुक्त को लिखा पत्र

6 वर्ष पहले
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ग्वालियर। व्यापमं घोटाले में आरोपी इंजीनियर की धरपकड़ के लिए एसआईटी ने कोशिशें तेज कर दी हैं। पीएमटी-2009 परीक्षा में फर्जी तरीके से अपने पुत्र को प्रवेश सिलेक्ट कराने वाले नगर निगम के इंजीनियर अतिबल सिंह यादव की गिरफ्तारी के लिए एसआईटी प्रभारी वीरेंद्र जैन ने निगमायुक्त से मदद मांगी है।
नगर निगम इंजीनियर यादव की तलाश में जुटी एसआईटी ने अब विभागीय दबाव बनाना भी शुरू कर दिया है। निगमायुक्त अजय गुप्ता को लिखे पत्र में एसआईटी प्रभारी जैन ने जानकारी दी है कि अतिबल सिंह यादव की गिरफ्तारी पर पुलिस ने तीन हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया है। पत्र में निगमायुक्त से अतिबल सिंह की गिरफ्तारी में मदद का अनुरोध किया है।
पक्षपात के आरोपों से दबाव में एसआईटी
दरअसल एसआईटी पर घोटाले के आरोपियों की गिरफ्तारी में पक्षपात का आरोप लगने लगे हैं। कहा जाने लगा है कि एसआईटी महज ऐसे लोगों को पकड़ रही है, जो रसूखदार नहीं हैं। महीनों से फरार यादव के आरोपी घोषित किए जाने के कुछ समय बाद तक ऑफिस में आते रहने की भी चर्चा होती रही है। एसआईटी पर दबाव की वजह 15 मार्च तक सारे आरोपियों को पेश करने के अल्टीमेटम भी बताया जा रहा है।
मेयर-इन-काउंसिल में भेजा जाएगा प्रस्ताव
एसआईटी का पत्र मिलने के बाद निगमायुक्त ने फरार इंजीनियर के खिलाफ कार्यवाही के लिए प्रस्ताव भेजे जाने की तैयारी कर ली है। कमिश्नर के मुताबिक अतिबल सिंह यादव कार्यपालन यंत्री के पद पर हैं। उनके खिलाफ कार्यवाही कमिश्नर अधिकार क्षेत्र में नहीं है। निगमायुक्त गुप्ता के मुताबिक एसआईटी का पत्र का हवाला देते हुए मेयर-इन-काउंसिल से उनके निलंबन की अनुशंसा की जाएगी।
उत्तर प्रदेश में भी अतिबल की तलाश
एसआईटी ने ग्वालियर स्थित अतिबल के सरकारी आवास पर छापा मारा , लेकिन वह नहीं मिला। इस बीच एसआईटी को सूचना मिली है कि अतिबल के कुछ कारोबारी रिश्ते भी इटावा में हैं, जिसके कारण यादव उप्र के इटावा में शरण ले सकता है। लिहाजा तलाश में एसआईटी ने उप्र के इटावा सहित कई शहरों में दबिश दी। हालांकि अभी वो पकड़ में नहीं आया, लेकिन अफसरों को उम्मीद है कि जल्द ही यादव पुलिस की गिरफ्त में होंगें। एसआईटी उप्र के उस रैकेट को भी लाने की कोशिश में है, जो मध्यप्रदेश की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए सॉल्वर जुटाता है।