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झूठ बोलकर करा रहे रजिस्ट्री, स्टॉम्प ड्यूटी बचाने के लिए मकान को बताया प्लॉट

7 वर्ष पहले
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ग्वालियर. स्टाम्प ड्यूटी बचाने के लिए कोई मकान को प्लॉट बता रहा है तो कोई दुकानों को मकान। इस तरह के मामले उप पंजीयक की मौका जांच बंद होने के बाद लगातार बढ़ते जा रहे हैं। पिछले आठ माह में अंचल में ऐसे 94 मामले पकड़ में आए हैं। अब इन सभी में संपत्ति खरीदारों से वसूली होगी।

पंजीयन विभाग की आय में लगातार हो रही गिरावट के कारण अफसरों की चिंता बढ़ गई है। ऐसा प्रॉपर्टी बाजार में मंदी व स्टाम्प ड्यूटी की चोरी के बढ़ते चलन के कारण हो रहा है। पंजीयन विभाग ने एक जनवरी 2013 से उप पंजीयकों को संपत्ति की मौका जांच से रोक दिया है। अब केवल खरीदार-विक्रेता के शपथ पत्र के आधार पर ही दस्तावेज पंजीयन होते हैं। इस व्यवस्था के बाद रेंडम जांच के निर्देश हैं और अफसरों का अलग-अलग कोटा भी तय है। रेंडम जांच की जानकारी मई से ऑनलाइन दर्ज होने लगी है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर मई से दिसंबर 2013 तक महानिरीक्षक पंजीयन ने 23 ऐसे मामले पकड़े हैं, जिनमें संपत्ति खरीदार ने मकान को प्लॉट या दुकानों को मकान बताकर दस्तावेज पंजीयन करा लिए। इसी तरह से 71 मामले उप महानिरीक्षक पंजीयन ने भी पकड़े हैं।

सभी पर लग सकता है जुर्माना

भारतीय स्टाम्प अधिनियम की धारा 47 (क-3) के मुताबिक पांच साल के अंदर ऐसे प्रकरण संज्ञान में लेकर अंतर की राशि वसूल करने का प्रावधान है। अधिनियम की धारा 27 में खरीदार यदि गलत जानकारी देता है तो उस पर कार्रवाई हो सकती है, जबकि धारा 64 में जुर्माने का प्रावधान है।

रेंडम जांच में पकड़े गए ९४ प्रकरणों में होगी वसूली

॥एसोटेक ने पंजीयन विभाग को 4.15 करोड़ का नुकसान पहुंचाया है। इसकी जांच कर प्रकरण दर्ज करने के लिए वरिष्ठ जिला पंजीयक को कहा गया है। रेंडम जांच में पकड़े गए 94 प्रकरणों में वसूली एवं अभियोजन की कार्रवाई की जाएगी।- राजीव जैन, उप महानिरीक्षक पंजीयन

बिल्डर ने की स्टाम्प ड्यूटी में हेराफेरी

ग्वालियरत्न बिल्डर ने स्टाम्प ड्यूटी में हेराफेरी कर पंजीयन विभाग को चार करोड़ रुपए से ज्यादा का चूना लगा दिया है। डूब में गई राशि की वसूली के लिए विभाग अब प्रकरण दर्ज कर रहा है। इस बात का खुलासा उप महानिरीक्षक पंजीयन की प्रारंभिक जांच में हुआ है। डिटेल जांच वरिष्ठ जिला पंजीयक कर रहे हैं।

महानिरीक्षक पंजीयन ने 16 जनवरी को पंजीयन विभाग के मैदानी अफसरों को निर्देश दिए हैं वे वाणिज्यिक कर विभाग की जांच में जब्त दस्तावेज का बारीकी से परीक्षण करें। इसी आधार पर उप महानिरीक्षक पंजीयन राजीव जैन ने वाणिज्यिक कर दफ्तर जाकर एसोटेक सीपी इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रालि के दस्तावेज देखे। इस बिल्डर के यहां पर वाणिज्यिक कर की कर अपवंचन इकाई ने 23 मार्च 2013 को छापा मारा था। दो सौ दस्तावेज भी जब्त कर लिए थे। श्री जैन ने इन्हीं दस्तावेज की जांच में लगभग 4 करोड़ 15 लाख रु. की स्टाम्प चोरी पकड़ी है। डिप्टी कमिश्नर एंटी इवेजन वाणिज्यिक कर आईपी जैन ने कहा- छापे के बाद टैक्स चोरी के एवज में एक करोड रु. जमा कराए जा चुके हैं। स्टाम्प शुल्क चोरी की जांच डीआईजी पंजीयन को करना है।

100 रुपए के स्टाम्प पर हुए एग्रीमेंट

: फ्लैट खरीदारों से बिल्डर ने सौ रुपए के स्टाम्प पर एग्रीमेंट किया। इसे नाम आवंटन पत्र का दिया, जबकि यह था एग्रीमेंट। एग्रीमेंट पर एक फीसदी स्टाम्प ड्यूटी लगती है, जबकि विभाग को मिले केवल सौ रुपए। दो सौ दस्तावेज में लगभग 40 लाख के नुकसान का अनुमान है।

: भूमि मालिक व भूमि के विकासकर्ता के बीच 4 अप्रैल 2008 को पहला अनुबंध 4 करोड़ 56 लाख 38 हजार 138 रुपए में हुआ। बाद में यह बढ़कर 15 अक्टूबर 2012 को 125 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। स्टाम्प एक्ट के मुताबिक 125 करोड़ पर तीन फीसदी ड्यूटी मिलनी चाहिए थी पर नहीं मिली।

: कुछ मामलों में फ्लैट की कुल कीमत को भी बदला गया है। एग्रीमेंट में जिस फ्लैट (डुप्लेक्स) को 28 लाख 45 हजार रुपए का बताया गया है, उसे बाद में 27 लाख 75 हजार (बैंक आदि में) या कुछ अन्य कीमत का बताया गया है।

बिल्डर को दिया नोटिस: वरिष्ठ जिला पंजीयक एके सिंह ने कहा कि भूमि स्वामी व विकासकर्ता के बीच हुए अनुबंध पर 3.75 करोड़ रु. की वसूली के लिए नोटिस जारी हो गया है। जब्त सभी दो सौ दस्तावेज की फोटो कॉपी ली जा रही है। इसके बाद फ्लैट के खरीदारों पर प्रकरण दर्ज कर उनसे राशि वसूली की जाएगी।

हेड ऑफिस तय करता है पॉलिसी
॥खरीद-बिक्री के एग्रीमेंट सहित अन्य सभी मामलों की पॉलिसी हेड ऑफिस से तय होती हैं। स्थानीय स्टाफ तो उनकेे निर्देशों के अनुसार कार्य करता है। पूरे मामले की जानकारी मुझे नहीं है।
पीके श्रीवास्तव, सीनियर एक्जीक्यूटिव व लाइजनिंग ऑफिसर, एसोटेक सीपी इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड