ग्वालियर. स्वाइन फ्लू विकराल रूप लेता जा रहा है। डॉक्टर्स और पैरामेडिकल स्टाफ स्वाइन फ्लू के संदिग्ध मरीजों का इलाज करने में डरे हुए हैं। जेएएच की ओपीडी के साथ निजी डॉक्टरों के क्लीनिक पर मरीजों की भीड़ उमड़ रही है। कुछ स्कूलों में बच्चे मास्क पहनकर भी आने लगे हैं।
इधर जिला अस्पतालों में फैली अव्यवस्थाओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। मास्क और टेमी फ्लू की टैबलेट खत्म हो रही हैं। डॉक्टर्स और पेरा मेडिकल स्टाफ को डिमांड के बाद भी एन 95 मास्क की पूर्ति नहीं हो सकी है।
एक डॉक्टर सहित दो को और निकला स्वाइन फ्लू
स्वाइन फ्लू के चार मरीजों के सैंपल की जांच गुरुवार को डीआरडीई में की गई। इसमें जेएएच की डॉ. नेहा और भिंड की राधा को स्वाइन फ्लू होने की पुष्टि हुई है। इससे पहले एक जूनियर डॉक्टर को भी स्वाइन फ्लू हो चुका है। डॉ. नेहा के पति डॉ. नरेंद्र ने बताया कि डॉ. नेहा को घर पर ही आइसोलेशन में रखा गया है। पिछले 21 दिन में 17 मरीजों को स्वाइन फ्लू होने की पुष्टि हुई है। जबकि चार की मौत हो चुकी है।
अस्पतालों में है दवा की कमी: अस्पतालों में स्वाइन फ्लू की दवा की कमी है। जिला अस्पताल मुरार में टेमी फ्लू की 75 मिग्रा की 10 और 30 मिग्रा की 70 टैबलेट बची हैं। जिला अस्पताल प्रबंधन ने 200 टैबलेट और एन-95 के 40 मास्क मांगे हैं। उधर जेएएच में टेमी फ्लू की टैबलेट सौ से भी कम हैं। जेएएच प्रशासन ने सीएमएचओ से दवा और मास्क मांगे हैं।
कोल्ड क्लीनिक में बढ़ रहे हैं मरीज
स्वाइन फ्लू को लेकर लोगों में दहशत है। खांसी, जुकाम के मरीज जिला अस्पताल और जेएएच में बनाई गई कोल्ड क्लीनिक में इलाज के लिए आ रहे हैं। जिला अस्पताल में गुरुवार को 24 मरीज दिखाने आए। वहीं जेएएच की ओपीडी में दोपहर 12 बजे तक 32 मरीज।