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स्वाइन फ्लू: न पर्याप्त दवाइयां न ही इंतजाम, सिर्फ गर्मी बढ़ने का इंतजार

6 वर्ष पहले
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ग्वालियर. जिला अस्पताल में दवाओं व सुविधाओं का अभाव। प्रशिक्षित स्टाफ की कमी। जागरूकता अभियान के नाम पर सिर्फ कागजी कार्रवाई। वैक्सीनेशन की व्यवस्था नहीं। ये ही कारण हैं कि स्वाइन फ्लू विकराल रूप लेता जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के पास इससे निपटने के लिए न इंतजाम हैं और न कोई योजना।
विभाग की तैयारियों को देखकर लगता है कि अफसर स्वाइन फ्लू से निपटने के लिए मौसम में बदलाव का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि जैसे ही तापमान बढ़ता है स्वाइन फ्लू का वायरस खुद ब खुद निष्प्रभावी हो जाता है।
35 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान पर निष्क्रिय हो जाएगा वायरस
संभाग के सभी जिला अस्पताल रैफरल यूनिट बनकर रह गए हैं। इससे जेएएच में मरीज क्षमता से अधिक हो गए हैं। जूडा अध्यक्ष डॉ. गिरीश चतुर्वेदी ने बताया स्वाइन फ्लू का वायरस चार से 16 डिग्री तापमान पर सबसे अधिक घातक होता है। 16 से 26 डिग्री तापमान पर असर कम हो जाता है जबकि 35 डिग्री तापमान पर इसका वायरस निष्क्रिय हो जाता है।
चार और मरीजों के सैंपल भेजे
स्वाइन फ्लू के चार संदिग्ध मरीजों के सैंपल सीएमएचओ कार्यालय से डीआरडीई भेजे गए हैं। इनमें से दो सैंपल बिड़ला हॉस्पिटल और दो जेएएच से आए हैं। वहीं बीते रोज भेजे गए स्वाइन फ्लू के सैंपल की रिपोर्ट बुधवार को आ गई। इन मरीजों को जांच में स्वाइन फ्लू होने की पुष्टि नहीं हुई है।
संचालक ने किया निरीक्षण
संचालक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. बीएस औहरी बुधवार को ग्वालियर आए। इन्होंने सीएमएचओ डॉ. अनूप कम्ठान के साथ जिला अस्पताल मुरार, बिड़ला हॉस्पिटल और जेएएच में स्वाइन फ्लू से निपटने के इंतजामों का निरीक्षण किया। उन्होंने सीएमएचओ को निर्देश दिए कि जागरूकता के लिए शहर में पोस्टर लगवाएं।

डॉक्टरों में भी दहशत
स्वाइन फ्लू की दहशत डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ में भी है। कुछ ने तो वैक्सीन भी लगवा लिए हैं तो कुछ ओपीडी में सीनियर डॉक्टर्स से मिलकर इस संबंध में जानकारी ले रहे हैं। जिला अस्पताल और जेएच में चल रहे कोल्ड क्लीनिक में बुधवार को भी मरीज दिखाने पहुंचे।
एपीडीमियोलॉजिस्ट को नोटिस
स्वाइन फ्लू के तीन मरीज मिलने के बाद प्रतिरोधात्मक कार्रवाई नहीं करने पर संभागीय संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. निधि व्यास ने एपीडीमियोलॉजिस्ट डॉ. सुनील अग्रवाल को नोटिस जारी किया है। नोटिस में डॉ. अग्रवाल को अपना पक्ष तीन दिन में रखने के लिए कहा गया है।
डॉक्टरों और मेडिको ने कहा- कराया जाए टीकाकरण
सीएमई में संचालक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. बीएस औहरी ने जब पूछा कि कितने लोग वैक्सीन लगवाना चाहते हैं तो अधिकांश ने हामी भरी। डॉ. औहरी ने कहा कि वैक्सीन सिर्फ तीन से चार सप्ताह के बाद असरकारक होती है। इसलिए सावधानी ही सबसे बेहतर उपाय है।
ओपीडी में डॉक्टर सहित पूरे स्टाफ ने लगाए मास्क
स्वाइन फ्लू के भय से जेएएच में बुधवार को डॉक्टर, जूनियर डॉक्टर, पैरा मेडिकल स्टाफ के साथ पूरा स्टाफ मास्क लगाए थे। कुछ लोग एन-95 मास्क तो कुछ थ्री लेयर वाले मास्क पहने थे। अस्पताल में भी कुछ मरीज भी मास्क लगाए थे।
सर्दी प्रारंभ होने से पहले हर साल कराएं टीकाकरण
जीआरएमसी में स्वाइन फ्लू को लेकर सीएमई हुई। डीन डॉ. जीएस पटेल ने जेएएच में हुए इंतजामों और पीएसएम के विभागाध्यक्ष डॉ. एके भागवत ने स्वाइन फ्लू फैलने के बारे में बताया। पीडियाट्रिक के विभागाध्यक्ष डॉ. अजय गौड़ ने कहा कि पांच साल से छोटे बच्चे, 65 साल से अधिक उम्र के व्यक्तियों, गर्भवती महिलाओं और लंबे समय से बीमार चल रहे लोगों को हर साल सर्दी प्रारंभ होने से पहले टीका लगवाना चाहिए।
यह रही अंचल की स्थिति
भिंड : स्वाइन फ्लू से जिले में एक महिला की मौत हो चुकी है। जांच में दो अन्य मरीजों को स्वाइन फ्लू की पुष्टि हो चुकी है। तीन मरीजों का सैंपल भेजा गया है। जिला अस्पताल में मास्क व दवाओं की कमी है। भोपाल व जबलपुर से टैमी फ्लू मंगाई गई है।
दतिया: स्वाइन फ्लू से एक भी मौत नहीं हुई है। जिला अस्पतालाें में जांच के लिए 12 किट उपलब्ध हैं। जिला मुख्यालय पर सौ टैबलेट हैं।
शिवपुरी: स्वाइन फ्लू से जिले में एक गर्भवती महिला की मौत हो चुकी है। एक संदिग्ध मरीज मिला है। मरीजों का सैेंपल लेने वाला स्टाफ नहीं है। जिला अस्पताल में आईसोलेशन वार्ड तो बना दिया है, लेकिन जब पैथोलॉजिस्ट ही नहीं तो मरीज कैसे चिन्हित होगा..?

दवाओं की क्या स्थिति- सीएस व सीएमएचओ दवा पर्याप्त होने की बात कह रहे हैं, लेकिन अभी तक किसी को उपयोग की जरूरत ही नहीं पड़ी।
मुरैना: जिले में स्वाइन फ्लू से एक भी मौत नहीं। एक स्वाइन फ्लू पॉजीटिव मिला है। जिला अस्पताल में टैमी फ्लू की सिर्फ 100 टैबलेट उपलब्ध है।