पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • तानसेन जब बचपन में छुप कर दहाड़ता था तो जंगली जानवर शेर के अहसास से सहम उठते थे।

हूबहू शेर जैसी दहाड़ निकालने की महारथ ने तानसेन को बनाया ‘संगीत-सम्राट’

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
(तानसेन की पेंटिंग)
ग्वालियर में 12-15 दिसंबर तक तानसेन समारोह आयोजित किया जा रहा है। इस अवसर पर हम आपको बता रहे हैं तानसेन के बारे में कुछ रोचक जानकारियां...
ग्वालियर. ग्वालियर से करीब 40 किलोमीटर दूर झिलमिल गांव में 7-8 साल का नटखट तन्ना जब छुप कर दहाड़ता था तो जंगली जानवर शेर के अहसास से सहम उठते थे, चरवाहे सतर्क हो कर जानवरों को इकट्ठा कर लेते थे और खेतों में काम कर रहे किसान आत्मरक्षा की मुद्रा में आ जाते थे।
मकरंद पांडे का नटखट बेटा जानवरों की बोली हूबहू बोलने की अपनी कला से अपने बाग की रखवाली भी करता था। नटखट तन्ना या तनसुख पांडे अपनी इसी प्रतिभा की बदौलत संगीत-सम्राट बना और मंगल-सम्राट अकबर के नवरत्नों में शुमार हो गया।
स्वामी हरिदास ने पहचानी तानसेन की प्रतिभा
वृन्दावन के सन्यासी और भक्तिकाल के महान संगीतकार स्वामी हरिदास अपनी शिष्य-मंडली के साथ तन्ना के बाग से गुज़र रहे थे कि अचानक उन्हें शेर की दहाड़ सुनाई दी। सभी शिष्यों की डर के मारे मानों जान ही निकल गई, लेकिन स्वामी जी को उस स्थान पर शेर के होने का कतई यकीन नहीं हुआ। थोड़ी सी खोजबीन के बाद आखिर दहाड़ता हुआ बालक तन्ना नजर आ ही गया।
बच्चे की इस शरारत से स्वामी जी नाराज नहीं, खुश हुए। उन्होंने बालक से दूसरे पशु-पक्षियों की आवाज भी सुनी तो समझ गए कि वह असाधारण प्रतिभा का मालिक है। उन्होंने पिता से तन्ना को मांग लिया और अपने साथ ही वृंदावन ले आए। गुरु की शिक्षा, जन्मजात प्रतिभा और कड़ी साधना से 10 साल में ही तन्ना धुरंधर गायक बन गया।
आगे की स्लाइड में पढ़ें, राजा मानसिंह तोमर संगीत की संगीत शाला में निखरी प्रतिभा...