(सिटी सेंटर निवासी रंजना टोडपे।)
ग्वालियर. ग्वालियर की समृद्ध संगीत विरासत सदियों पुरानी हैं। इस संगीत परंपरा को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी अब बेटियां निभा रही हैं। इसकी शुरुआत हालांकि ग्वालियर घराने के मूर्धन्य गायक पद्मभूषण पंडित कृष्णराव शंकर पंडित की पौत्री मीता पंडित ने की।
इसके बाद निरंतर ग्वालियर संगीत घरानों से जुड़े परिवार की बेटियां आगे आ रही है। इसके लिए उनके फैमिली मेंबर अभिभावक के साथ गुुरु की भूमिका भी निभा रहे हैं। संगीतज्ञों का कहना है कि बेटों ने जब से संगीत से दूरी बना ली है, तब से बेटियों का रुझान इसमें बढ़ा है।
1 पहले खुद अब बेटी करेगी ग्वालियर घराने का प्रचार-प्रसार
सिटी सेंटर निवासी रंजना टोडपे का कहना है मेरे घर में शुरू से ही संगीत का माहौल रहा है। पिता भालचंद्र रानड़े से खयाल गायकी सीखी। ताकि ग्वालियर घराने की गायकी से जुड़ी रहंे। शादी के बाद पति ने सपोर्ट किया, जिसकी बदौलत विभिन्न मंच पर ग्वालियर घराने का प्रतिनिधत्व कर सकीं। एक दिन बेटी पूर्वी ने संगीत में कॅरियर बनाने की बात कही, तो मुझे काफी खुशी हुई। अब वो इस परंपरा को आगे बढ़ा रही है। साथ ही डॉ. अश्विनी देशपांडे से संगीत की शिक्षा ले रही है।
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