ग्वालियर. शहर में ऐसा गिरोह सक्रिय है जो आपसे बीमा पॉलिसी के भुगतान या फिर अन्य किसी बहाने से चेक लेता है, इस चेक को वह अपने इरेजेबल पेन से भरवाता है और फिर स्याही मिटाकर इसे दोबारा भरकर कैश करा लेता है। दीनदयाल नगर में रहने वाले एजी ऑफिस के रिटायर्ड अफसर कैलाश चंद्र गुप्ता से इसी तरह ठगी हो गई। ठग ने इनसे कहा कि उनकी बीमा पॉलिसी मेच्योर हो गई है, उसका भुगतान होना है इसलिए दो कैंसिल और दो 120-120 रुपए के चेक दे दें।
ठग ने श्री गुप्ता से चेक लिए लेकिन उन्हें भरवाया अपने इरेजेबल पेन से। इसके बाद पेन से अमाउंट मिटाकर चेक दोबारा भर लिया और दो अलग-अलग खातों से 2.35 लाख रुपए निकाल लिए। अपने साथ हुई ठगी की भनक श्री गुप्ता को 13 सितंबर को लगी, जबकि उक्त चेक उन्होंने 16 अगस्त को दिए थे।
डीडी नगर में रहने वाले कैलाश चंद्र गुप्ता एजी ऑफिस के डिवीजनल एकाउंट ऑफिसर पद से रिटायर्ड हुए हैं। उन्होंने अपनी पत्नी मिथलेश गुप्ता और नाती ज्योतिर्मय के नाम से आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल में बीमा पॉलिसी कराई थी। अगस्त के पहले सप्ताह में दिल्ली से फोन आया कि पॉलिसी मेच्योर हो गई हैं। आप दो 120-120 रुपए के और दो कैंसिल चेक दे दें तो आपके एकाउंट में रुपए आ जाएंगे।
फोन करने वाले ने कहा कि आपके पास कंपनी का प्रतिनिधि आएगा वह प्रक्रिया पूरी करा लेगा। 16 अगस्त को एक युवक आया इसने खुद को बीमा कंपनी का कर्मचारी बताया, श्री गुप्ता ने उससे आईडेंटिटी कार्ड मांगा तो उसने कहा कि उसकी नई नौकरी लगी है इसलिए कार्ड नहीं बना है। श्री गुप्ता इसके बाद अपने पेन से चेक भर रहे थे तो उसने अपना पेन दिया और कहा कि इस पेन से चेक भर दीजिए।
श्री गुप्ता ने इसके बाद दो चेक कैंसिल कर उन पर हस्ताक्षर कर दिए। श्री गुप्ता यह प्रक्रिया के बाद कुछ समय के लिए शहर से बाहर चले गए थे। वे लौटकर आए तो उन्होंने डीडी नगर स्थित बैंक ऑफ इंडिया की शाखा में अपना पेंशन एकाउंट चेक किया तो इसमें से 85 हजार रुपए गायब थे। उन्होंने मुरार की आईसीआईसीआई बैंक की शाखा का एकाउंट चेक किया तो इसमें से भी डेढ़ लाख रुपए गायब थे। उन्होंने दोनों बैंकों के प्रबंधन और महाराजपुरा तथा मुरार थाने की पुलिस से शिकायत की है।
70 रुपए के पेन से बड़ा धोखा
जिस इरेजेबल पेन के जरिए धोखा दिया जा रहा है वह बाजार में महज सत्तर रुपए में उपलब्ध हो जाता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि यह पेन थर्मो सेंसटिव फ्रिक्शन इंक फॉर्मूला से बनता है यानि रगड़ से उत्पन्न हुई गर्मी स्याही मिट जाती है। रगड़ के लिए पेन के पीछे ही इरेजर लगा रहता है। पेन की इंक इस इरेजर से मिट जाती है।
एसएमएस अलर्ट भी नहीं आया
श्री गुप्ता कहते हैं वे बैंक से रुपया निकालते हैं तो उनके
मोबाइल फोन पर इस जानकारी का मैसेज आता था लेकिन जब ठग ने रु. निकालने पर इसका एसएमएस अलर्ट नहीं आया। श्री गुप्ता ने कहा- उनकी बीमा पॉलिसी के बारे में भी जानकारी बीमा कंपनी से ही लीक हुई होगी अन्यथा ठग को इसकी जानकारी कैसे मिलती।
चेक पर अपने ही पेन से करें दस्तखत
आप किसी अनजान व्यक्ति को चेक दे रहे हैं तो उसे अपने पेन से ही भरें और हस्ताक्षर करें। अगर आप उस अनजान व्यक्ति के पेन चेक भरते हैं तो आपके साथ धोखा हो सकता है। > किसी को चेक दें तो इसे अपने पेन से ही भरें। > किसी बैंक, बीमा कंपनी या फिर अन्य वित्तीय संस्थान से कोई व्यक्ति रुपए या चेक लेने आता है तो उसके बारे में संबंधित संस्था से पूछताछ जरूर कर लें। > आपके यहां आने वाले कर्मचारी का आईडेंटिटी कार्ड जरूर देखें।