पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Two Friends Suicide In Gwalior Tihra Dam

दो दोस्तों का दुखद अंत: एक कूदा नदी में तो दूसरा ने भी खत्म की जिंदगी

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
ग्वालियर. रोहित तिघरा में कूद गया है, लोग मुझसे सवाल करेंगे, इसलिए मैं भी कूद रहा हूं। यह इबारत है 17 वर्ष के हृदय शंकर के सुसाइड नोट की, जिसे लिखने के साथ ही उसने सोमवार को तिघरा डैम में छलांग लगा दी। ठीक इससे पहले उसका दोस्त रोहित (16) एक सुसाइड नोट छोड़कर खुदकुशी के लिए डैम में कूद गया था। रोहित दरअसल अपने पापा की बात से आहत था। उसके पिता ने अपनी जेब से 100 रुपए कम होने पर उससे पूछ लिया था कि वो पैसे उसने तो नहीं निकाले। गोरखी स्कूल में 11 वीं में पढ़ने वाले ये दोनों ही छात्र पढ़ाई में होशियार थे।
दोनों ही अपने एक और दोस्त गौतम के साथ बाइक से दोपहर बाद तीन बजे तिघरा पहुंचे थे। रोहित दो बहनों में इकलौता था। जबकि हृदय शंकर तीन भाइयों में बीच का था। इनमें से हृदय का शव पुलिस ने डैम से निकाल लिया, जबकि रोहित का शव रात तक नहीं मिला था।
सिकंदर कंपू कुम्हार मोहल्ला में रहने वाले रोहित पुत्र रामकिशन दोहरे, सैनिक कालोनी पटिया वाला मोहल्ला निवासी हृदय शंकर अवस्थी(17)पुत्र निर्मल अवस्थी और थाटीपुर में रहने वाला गौतम दोपहर बाद 3 बजे तिघरा डैम पर पहुंचे थे।
दोनों के सुसाइड नोट का मजमून
पापा आपकी जेब से रुपए मैंने नहीं निकाले
पापा आपकी जेब से रुपए मैंने नहीं निकाले। अब आपके रुपए कभी कोई नहीं निकालेगा, क्योंकि मैं जा रहा हूं। नेहा दीदी का फिजिकल टेस्ट करा देना और मेरे जाने पर आप दोनों रोना नहीं। जीनी (पालतू कुतिया) को खाना देते रहना।
-रोहित
रोहित कूद गया, मैं कहीं फंस न जाऊं
रोहित मेरे सामने तिघरा में कूद गया। मैं कहीं फंस न जाऊं, लोग मुझसे सवाल करेंगे। इसलिए मैं भी कूद रहा हूं। जूही, सुंदरी, भोंदू को लव (पालतू)
-हृदय शंकर अवस्थी
सपने दिखाकर मुझे बेसहारा छोड़ गया रोहित
पापा को बड़ा आदमी बनने के सपने दिखाता था और खुद बेसहारा छोड़कर चला गया। यह पीड़ा है आंसुओं के सैलाब में डूबे रामकिशन की, जिनके बेटे रोहित का शव अभी तक नहीं मिला है। जबकि उसे खुदकुशी करते देख उसके पीछे तिघरा डैम में कूदे हृदय शंकर का शव निकाल लिया गया है। बेटे की मौत के गम से बेहाल रामकिशन घर पर रोते-रोते बेहोश हो जाते हैं और होेश आने पर फिर रोने लगते हैं। उन्हें क्या पता था कि उनका होनहार बेटा इस तरह से बिछुड़ जाएगा।
सौ रुपए के बारे में पूछने से व्यथित था रोहित: रोहित के पिता रविवार को घर में मेवा खरीदकर लाए थे, क्योंकि उनकी बड़ी बेटी का एसआई के लिए चयन हुआ है और जल्द ही उसका फिजिकल टेस्ट होना है। उनके पास दो हजार रुपए थे जिसमें से 1800 रु. खर्च हो गए थे और दो सौ रुपए जेब में थे। रविवार की रात उनकी जेब से सौ रु. निकल गए तो उन्होंने रोहित से पूछ लिया कि रुपए उसने तो नहीं निकाले। इसी से रोहित व्यथित हो गया था।
रोहित ने गौतम को बुलाया था, दोनों को पता नहीं था उसका इरादा
रोहित ने सोमवार को थाटीपुर में रहने वाले दोस्त गौतम को फोन करके बुलाया। गौतम उससे मिलने आ रहा था तो रास्ते में उसे हृदय शंकर अवस्थी मिला। उसने, उसे भी साथ ले लिया और दोनों रोहित के घर पहुंचे। इसके बाद तीनों घर से घूमने चल दिए। लेकिन दोनों को रोहित के इरादे का पता नहीं था।
पहले किले पर जाने का प्लान था
रोहित के घर से तीनों सिकन्दर कंपू चौराहे पर पहुंचे और वहां पर रोहित ने किले पर चलने को कहा। लेकिन बाद में किले न जाकर उन्होंने तिघरा जाने का प्लान बनाया। वे बाइक से तिघरा पहुंचे। जब गौतम बाइक खड़ी कर रहा था तो रोहित दौड़ कर ऊपर पहुंचा और कॉपी में सुसाइड नोट रखकर गौतम से उसका मोबाइल फोन मांगा और अपनी बहन को फोन लगा कर बताया कि वे तिघरा घूम रहे हैं। इसके बाद हृदय शंकर ने भी उसकी बहन से बात की। इसके बाद उन्होंने मोबाइल पानी में फेंक दिया।
जब तक गौतम कुछ समझता उससे पहले ही रोहित ने पानी में छलांग लगा दी। वह मदद के लिए आवाज लगा रहा था तभी एक पर्ची लिखकर कॉपी में रखकर हृदय शंकर ने भी छलांग लगा दी। हृदय शंकर ने गौतम को कॉपी में रखे सुसाइड नोट उठाने को आवाज भी दी। उनको पानी में गोते खाते देख गौतम ने मदद के लिए आवाज लगाई, इसी दौरान वहां पर एक युवक दिखाई दिया। गौतम ने उसे पूरी घटना बताई तो उसने उसे थाने में सूचना देने को कहा।
पढ़ाई में होशियार थे दोनों: मृतक छात्रों के दोस्तों ने बताया कि रोहित और हृदय शंकर पढ़ने में काफी होशियार थे। हाईस्कूल परीक्षा में ह्रदेश के अंक 93 फीसदी थे और पांच विषयों में डी लगी थी। रोहित 11वीं का छात्र था। हाईस्कूल में उसके 87 प्रतिशत अंक थे। सोमवार को उनकी परीक्षा थी, लेकिन वे परीक्षा देने नहीं गए थे।
चाय की दुकान चलाकर बेटों को पढ़ा रहे हैं निर्मल: तिघरा में कूदकर जान देने वाले छात्र हृदय शंकर के पिता निर्मल अवस्थी कंपू पर चाय बेचते हैं। उसके दो भाई हैं। वहीं रोहित के पिता रामकिशन कलेक्टोरेट में पदस्थ हैं। वह अपने पिता का इकलौता बेटा था। जबकि उसकी दो बहनें हैं।
आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें......