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दो पक्षों ने एक गाय पर जताया हक, पुलिस ने खरीदकर किया निपटारा

7 वर्ष पहले
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ग्वालियर. श्यामा गाय पर हक को लेकर दो पक्षों में चल रहा विवाद मंगलवार को जनकगंज थाने में सुलझा। दोनों पक्षों ने यहां हनुमान मंदिर में कसमें खाईं और बोले- साहब, गाय हमारी है। इसके बाद यह तय हुआ कि दोनों के घर से सौ मीटर दूर गाय छोड़ दी जाए, यह जिसके घर जाएगी, उसकी मानी जाए। लेकिन इस पर भी सहमति नहीं बनी तो पुलिस ने पंच परमेश्वर की भूमिका निभाते हुए कहा- गाय हमें दे दो और इसके पैसे से भंडारा कराओ। इस पर दोनों पक्ष सहमत हो गए। अब गाय थाने में ही पलेगी आैर इसके पैसे से भंडारा कराया जाएगा। भंडारा 30 सितंबर को जनकगंज थाने में होगा और इसमें दोनों पक्ष अपने नाते-रिश्तेदारों के साथ शामिल होंगे।
हुआ यूं कि सोमवार रात को श्यामा नाम की एक गाय को लेकर पाटनकर का बाड़ा, लक्ष्मीगंज में रहने वाले जगदीश पाल और नई सड़क पर रहने वाले जीवन सौदेसाई के बीच झगड़ा हो गया। ये लोग रात में ही जनकगंज थाने पहुंचे। यहां जगदीश पाल का कहना था कि गाय उनकी है और जीवन साैदेसाई ने जबरन अपने घर में बांध ली है। जब उन्हें इसका पता चला कि गाय जीवन के घर में हैं तो वे परिजन के साथ गाय लेने उनके घर पहुंचे।
यहां पर दोनों पक्षों में झगड़ा हो गया। इसके बाद दोनों पक्ष के लोग मंगलवार दोपहर श्यामा गाय को लेकर थाने पहुंच गए। वहीं जीवन का कहना था कि गाय उनकी है और कुछ महीने पहले यह गायब हो गई थी। उन्हें एक दिन यह गाय सड़क पर दिखाई दी तो वे उसे अपने घर ले आए। इनकी बातें सुनकर पुलिस अफसर ने कहा कि सुबह आपसी सहमति से मामले का निराकरण किया जाएगा। इसलिए आप-लोग सुबह आएं।
पुलिस ने खरीद ली गाय: पंचायत के बाद भी जब दोनों पक्षों के बीच मामला सुलझता दिखाई नहीं दिया तो टीआई श्री जैन ने गाय का बाजार मूल्य पूछा। इन लोगों ने दो-ढाई हजार रुपए बताया तो टीआई ने तुरंत दो हजार रुपए दोनों पक्षों के सामने मंदिर में रख दिए और आपसी सहमति बनी कि इन रुपए से भंडारा कराया जाए।
तीन घंटे की पंचायत, नहीं सुलझा मामला : दोनों पक्षों को टीआई जनकगंज निर्मल जैन ने थाने में बने हनुमान मंदिर में बैठाया कि वे हनुमान जी की कसम खाकर तय कर लें कि गाय किसकी है। यहां दोनों पक्षों ने टीआई के सामने कसम खाकर गाय पर अपना हक जताया। गाय की विशेषताएं बताते हुए एक पक्ष ने कहा कि उसके कान कटे हैं।
इससे वे अपनी गाय पहचान गए। इन्होंने कहा कि गाय के छह थन हैं और दो थनों से दूध कम आता है। दूसरे पक्ष ने भी वही बात कही। इस दौरान दोनों पक्षकारों के साथ उनके मोहल्ले वाले भी पहुंच गए और दावा करने लगे कि गाय उनके मोहल्ले की ही है। इसके बाद पुलिस ने दोनों पक्षों के सामने प्रस्ताव रखा कि गाय को उन दोनों के घर से सौ मीटर दूर छोड़ दिया जाए, जिसके घर गाय खुद पहुंच जाए, गाय उसकी मान ली जाए। इस पर दोनों पक्षों ने कहा कि चूंकि गाय दोनों के घर रही है। इसलिए वह दोनों के ही घर पहुंच जाएगी।