(फाइल फोटोः जीवाजी यूनिवर्सिटी)
ग्वालियर। जीवाजी यूनिवर्सिटी में उत्तर पुस्तिकाओं में हेराफेरी कर फेल छात्रा को पास करने और फर्जी मार्कशीट बनाने का मामले की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन कुलपति ने कर दिया है। इसके अलावा इसके अलावा गोपनीय विभाग में पदस्थ सभी नौ सर्विस प्रोवाइडरों को हटा दिया है।
जेयू की करेक्शन सेल में कार्यरत प्रशांत दुबे पर आरोप है कि उसने बीआरजी कॉलेज मुरार की बीएससी की छात्रा प्रियंका नरवरिया से रुपए लेकर उसे पांचवें सेमेस्टर में फर्जी तरीके से पास कर फाइनल सेमेस्टर की मार्कशीट बनाई है। इस मामले की जांच के लिए कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने ज्वाइंट प्रोक्टर प्रो. राधा तोमर, भौतिक शास्त्र के प्रो. यूपी वर्मा और गणित की प्रो. रेनू जैन ने नेतृत्व वाली जांच कमेटी को मंजूरी दे दी है। इसके अलावा सोमवार को गाेपनीय विभाग में पदस्थ सभी नौ सर्विस प्रोवाइडरों को हटा दिया है। उल्लेखनीय है कि बीएससी की छात्रा प्रियंका के इंड्रस्ट्रियल माइक्रो बॉयोलॉजी के पहले पेपर में नौ नंबर आए थे। सर्विस प्रोवाइडर ने इसे बढ़ाकर 17 कर दिया। वहीं दूसरे पेपर में सात से बढ़ाकर 19 नंबर कर दिए थे। जांच कमेटी एक सप्ताह में अपनी रिपोर्ट सौंपेंगी।
फर्जी मार्कशीट में दो कर्मचारियों के भी साइन
प्रियंका की पांचवें सेमेस्टर की मार्कशीट में चेकर के तौर पर कर्मचारी अनिल जामदार और चेतन राजौरिया के साइन हैं। कर्मचारियों ने जांच किए बिना मार्कशीट पर साइन क्यों किए, यह भी जांच का विषय है। इन कर्मचारियों की चुनाव में ड्यूटी लगी है। इस कारण इनसे पूछताछ नहीं हो सकी। मौजूद कर्मचारियों का कहना है कि ये साइन भी प्रशांत दुबे ने किए होंगे।
नियम विरुद्ध हैं सर्विस प्रोवाइडर
परीक्षा और गोपनीय विभाग में सर्विस प्रोवाइडरों द्वारा फर्जी मार्कशीट बनाने का यह पहला मामला नहीं है। इस तरह की शिकायतें पहले भी जेयू के अधिकारियों को मिलती रही हैं। जेयू प्रशासन ने इन्हें कुछ समय के लिए विभाग से हटा दिया था। लेकिन मामला शांत होते ही फिर रख लिया। इन्हें विभाग में रखने का नियम नहीं है। इसका विरोध डिप्टी रजिस्ट्रार सरिता चौहान कर चुकी हैं।