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ये है हकीकत.... 5 फरवरी 2013 दर्ज है मृत्यु की तारीख

5 वर्ष पहले
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न आईडी लगेगी, न गवाह, नपा में यलो फार्म भरो, आसानी से हो जाएगा मृत्यु का पंजीयन
नगरपालिका में यलो फार्म भरो, आसानी से किसी की भी मृत्यु का पंजीयन हो जाएगा। प्रमाणपत्र बनवाने में न तो खुद की पहचान व आईडी की जरूरत है न गवाह की। मृत्यु और उसके स्थल की पुष्टि का भी कोई वेरीफिकेशन नहीं होता। प्रमाण-पत्र बन जाए तो कोई भी आकर ले जाए। बस रजिस्टर में पावती पर दस्तखत करना होंगे।

इसी आसान तरीके से सीरियल किलर उदयन दास ने अपनी मां इंद्राणी दास का डेथ सर्टिफिकेट इटारसी नपा से बनवा लिया। इस फर्जीवाड़े का खुलासा चार साल बाद हुआ है। भास्कर ने जब नपा में मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने की तहकीकात की तो हर कदम पर लापरवाही उजागर हुई। नगरपालिका में न आईडी देने की जरूरत है न किसी गवाह की।

नपा के पास जन्म-मृत्यु पंजीयन का पुराना एक्ट

इंद्राणी दास के डेथ सर्टिफिकेट बनाने से चर्चा में आई नपा के जन्म-मृत्यु पंजीयन कक्ष में नया एक्ट नहीं है। प्रभारी सुनील कुमार तिवारी ने बाबू को एक्ट दिखाने को कहा तो उन्होंने पुराना एक्ट दिखा दिया। यह माना कि एक्ट में संशोधन हुआ है। हमारे पास नया एक्ट नहीं आया पर नियम सब पता हैं। पहले मृत्यु दिनांक से 3 दिन की समयावधि थी अब 21 दिनों की हो गई है। इसके बाद शपथपत्र लगता है। कोई वेरीफिकेशन नहीं हाेता।

इधर, इंद्राणी का मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने वाले डॉ. ठाकुर गायब

होशंगाबाद|
माता-पिता और गर्लफ्रेंड की हत्या करने वाले आरोपी उदयन की मां इंद्राणी का मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने वाले डाॅक्टर पुष्पराज सिंह ठाकुर दो दिन से जिला अस्पताल से गायब हैं। आकांक्षा मर्डर केस में कब्र खुदी तो एक के बाद एक राज उजागर हुए। डॉ. ठाकुर ने 2013 में इटारसी अस्पताल में रहते हुए इंद्राणी के मृत्यु प्रमाण पत्र के दस्तावेजों पर साइन किए थे। ठाकुर के साइन से ही नपा से डेट सर्टिफिकेट जारी हुआ। अब पिछले करीब 2 साल से होशंगाबाद जिला अस्पताल में पदस्थ हैं। सोमवार को उदयन की मां इंद्राणी का मृत्यु प्रमाण पत्र इटारसी से बनने की पुष्टी हो गई है। इस पुष्टी के बाद इसको बनाने में सहयोग करने वाली नर्स हेलिना दास, अन्य डाॅक्टर सहित स्टाफ गायब है। डॉ. पीएस ठाकुर की तो तबीयत खराब हो गई है। गलत तरीके से बनाए प्रमाण पत्र के मामले में अब पुलिस उनसे सघन पूछताछ करेगी। इसे देखते हुए वे जिला अस्पताल ड्यूटी पर नहीं आ रहे हैं। सोमवार को वे भोपाल के अशोका गार्डन में थे।

सीएमओ बोले- कैसे कहंे प्रमाण पत्र फर्जी
सीएमओ सुरेश दुबे का कहना है- इंद्राणी दास का डेथ सर्टिफिकेट कैसे जारी हुआ, यह मामला दिखवा रहे हैं। मृत्यु की जानकारी का फार्म मिलने पर पंजीयन किया है। पुलिस से मेमो नहीं मिला है न कोई जांच अधिकारी आए हैं। अभी कैसे कह सकते हैं मृत्यु प्रमाणपत्र फर्जी है। हम नपा से प्रतिवेदन देंगे। हालांकि पिछले छह महीने से शांतिधाम (श्मशानघाट) के प्रमाणपत्र पर मृत्यु पंजीयन किए जा रहे हैं। अस्पताल अधीक्षक डॉ. एके शिवानी का कहना है वे बाहर हैं। प्रभारी अधीक्षक डॉ. आरके चौधरी ने स्टॉफ नर्स हेलिना दास के आवेदन पर अनभिज्ञता जाहिर की।

वेरीफिकेशन नहीं होने से बन जाते गलत प्रमाण-पत्र, परिजन होते हैं परेशान
सभापति यज्ञदत्त गौर मानते हैं कि अभी मृत्यु की सिर्फ सूचना देकर कोई भी प्रमाणपत्र बनवा ले जाता है। सूचनादाता के साथ दो गवाह और इनकी आईडी होनी चाहिए। मृतक व मृत्यु की तारीख व स्थल का वेरीफिकेशन भी जरूरी है। एक बार इसी नपा से एक पंजीयन गलत मृत्यु तारीख का जारी हो गया था, जिससे मृतक के परिजन को पेंशन पाने में मुश्किल हो गई। पार्षद भागेश्वरी शिवकिशोर रावत ने बताया कि अलग-अलग सूचना पर एक व्यक्ति के तीन मृत्यु प्रमाणपत्र तक बन जाते हैं।

उदयन की मां इंद्राणी की मृत्यु का पंजीयन नंबर ‘91’
भास्कर ने नपा के जन्म-मृत्यु पंजीयन कक्ष से चार साल पुराना रिकार्ड निकलवाया तो 91 नंबर के मृत्यु रजिस्ट्रेशन पर 66 वर्षीय इंद्राणी दास का नाम आया। इसमें मृत्यु की तारीख 5 फरवरी 2013 दर्ज है। मृत्यु के समय का पता गांधीनगर इटारसी और स्थायी पता श्री निकेतन ऑफिस के पास रायपुर छत्तीसगढ़ बताया। मृत्यु का स्थान हेलिना दास गांधीनगर इटारसी लिखा गया है। सूचनाकर्ता उदयन दास गायत्री नगर रायपुर है। सर्टिफिकेट लेने 8 फरवरी 2013 को मनीष ठाकुर आया था।

मुख्य रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) का एक यलो फार्म होता है। फार्म भरवाकर सर्टिफिकेट दे दिया जाता है। वैधानिक जानकारी में मृतक का नाम, जेंडर, मृत्यु दिनांक, मृत्यु का स्थान, मृतक की माता का नाम, अायु, मृतक के पिता या पति का नाम, मृतक का मृत्यु के समय पता, मृतक का स्थायी पता और सूचनादाता का नाम व पता लिखा होता है।

खामियां: फार्म में मृतक से रिश्तेदारी का कोई कालम ही नहीं
नर्स हेलिना बोलीं- मैं न उदयन से मिली न देखा
इंद्राणी दास के डेथ सर्टिफिकेट में गांधीनगर की हेलिना दास का नाम दर्ज होने पर आगस्टिन दास दंपती भोपाल में पुलिस से मिले। नर्स हेलिना का कहना है कि वे न कभी उदयन से मिलीं न उसे देखा। शातिर उदयन दास ने उनके नाम व पते का गलत इस्तेमाल किया है। हम उदयन व इंद्राणी को नहीं जानते। जो फार्म नपा में मृत्यु पंजीयन के लिए दिया

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