• Hindi News
  • Local
  • Mp
  • Hoshangabad
  • 16 स्तंभों से मिलकर होता है यज्ञ शाला का निर्माण, यज्ञ में 21 जोड़ों ने छोड़ी आहुति

16 स्तंभों से मिलकर होता है यज्ञ शाला का निर्माण, यज्ञ में 21 जोड़ों ने छोड़ी आहुति

5 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
भास्कर संवाददाता | होशंगाबाद

हर्बल पार्क नर्मदा घाट पर सहस्त्र चंडी यज्ञ के चौथे दिन यज्ञशाला में 16 स्तंभों और पंच कुंड का महत्व बताया गया। पंडित तरुण तिवारी ने बताया कुंड में अग्नि प्रज्वलित करने के लिए आर्गन मंथन किया जाता है, जिसमें आर्गन सुक्त और वेदों का उच्चारण लगातार होता। सभी देवताओं को विशेष आहुति दी जाती है। यज्ञ में रोज 21 जोड़े हवन में आहुति छोड़ रहे हैं। एक यज्ञ शाला का निर्माण 16 स्तंभों को मिलाकर किया जाता है। हर स्तंभ पर लाल, काला, पीला, सफेद वस्त्र बांधे गए। वस्त्रों के माध्यम से इसमें देवताओं का वास होता है। जो देवता जिस वर्ण का होता उस को उसी रुप में वस्त्र के माध्यम से निरुपित किया जाता है। जिस में गणेश, विश्वकर्मा, ब्राह्मण, वरुण, अष्ठवशु, सोम, वायु देवताओं को सफेद वस्त्र में सूर्य नारायण, विष्णु, ईश्वर को लाल वस्त्र यमराज, नागराज, शिव, अनन्त देवताओं को काले और कुबेर, इंद्र, देवताओं को पीले वस्त्रों में निरुपित किया जाता है। पंच कुंडीय श्री सहस्त्र चंडी यज्ञ महोत्वव में 5 कुंड अलग-अलग आकृति के हैं। इसमें वृतकुंड, अर्ध चंद्र कुंड, पद्म कुंड, चतुष कुंड, प्रधान कुंड में अलग-अलग देवता का वास होता है।

होशंगाबाद| हर्बल पार्क घाट पर पंचकुंडी यज्ञ में आहुति देते श्रद्धालु।

खबरें और भी हैं...