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रेत पर लगने वाली रॉयल्टी की दर आधी करने की तैयारी

7 वर्ष पहले
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रेतपर लगने वाली राॅयल्टी को सरकार अाधा करने की तैयारी कर रही है। इसके साथ ही रेत की खदानें भी दो साल की बजाए पांच साल के लिए दी जाएंगी। नई रेत नीति में इन प्रावधानों को शामिल करने का काम लगभग अंतिम चरण में है। गुरुवार को ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के समक्ष प्रेजेंटेशन देकर खनिज विभाग ने इन बदलावों के बारे में उन्हें जानकारी दी। प्रेजेंटेशन में विभाग ने मुख्यमंत्री को भरोसा दिलाया कि इस कदम से रेत के दाम घट सकते हैं। 25 फरवरी को पेश हुए बजट में राज्य सरकार ने रेत पर वोल्यूमेटिक टैक्स 75 फीसदी (20 रुपए प्रति घन मीटर से 35 रुपए प्रति घन मीटर) बढ़ाया है। इससे प्रति ट्रक (9 टन रेत भराव की क्षमता वाले ट्रक में लगभग 7 घन मीटर रेत आती है) रेत के दामों में 75 रुपए तक इजाफा होने की संभावना है। राॅयल्टी आधी होगी तो कीमतों में कुछ कमी आएगी। प्रदेश में दो तरह से खदानों की नीलामी होती है। एक मप्र खनिज विकास निगम करता है, जिसके पास 18 जिले हैं। कलेक्टर शेष 33 जिले में नीलामी करते हैं। रेत पर रायल्टी 100 रुपए प्रति घन मीटर है, लेकिन खनिज निगम राॅयल्टी दो गुना यानी 200 रुपए ले रहा है। इसमें 100 रुपए खनिज निगम सरकार को देता है, शेष 100 रुपए से निगम के खर्चे चलते हैं। नई रेत नीति में खर्च के लिए ली जा रही इसी अतिरिक्त रायल्टी को खत्म किया जा रहा है।

एक्सपर्ट कमेंट्स

^राॅयल्टीआधी करने भर से रेत के दाम नहीं घटेंगे। इस समय एक ट्रक रेत 14 हजार से लेकर 18 हजार तक रहा है। इसमें ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। ई-ऑक्शन से भी बड़े ठेकेदार आएंगे और ज्यादा बोली लगाएंगे तो निश्चित रूप से रेत महंगी बेचेंगे। सरकार को चाहिए कि वह रेत उत्खनन को फ्री कर दे।’ -एसकेशाह, पूर्व खनिज संचालक

^सरकारराॅयल्टी घटाती है तो दामों में कुछ फर्क तो पड़ने की संभावना है, लेकिन यह भी साफ है कि पेट्रोल-डीजल के भाव गिरने के बाद भी कीमतें नहीं घटी हैं। कंस्ट्रक्शन क्षेत्र में मंदी का भावों पर जरूर फर्क पड़ा है।’ मनोजसिंह मीक, प्रवक्ता, क्रेडाई

नीति और ई-ऑक्शन में ये नए प्रावधान

}पहले ई-टेंडर होता था। अब ई-ऑक्शन किया जा रहा है। बोली ऑनलाइन लगेगी।

} पर्यावरण की स्वीकृति लेना और माइनिंग प्लान बनाना भी ठेका लेने वाली फर्म की जिम्मेदारी होगी।

} खनिज निगम के पास होशंगाबाद, हरदा, बड़वानी, धार और ग्वालियर समेत नर्मदा-चंबल नदी से सटे 18 जिलों में सिर्फ 53 तहसीलों में काम था। अब इन जिलों सभी खदानों की नीलामी खनिज निगम ही करेगा।