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रजिस्ट्री कराने वालों ने शपथ पत्र में दी थी गलत जानकारी

5 वर्ष पहले
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पंजीयन महानिरीक्षक दीपाली रस्तोगी ने पकड़ा था मामला

भास्कर संवाददाता | होशंगाबाद

इटारसी नगर पालिका सीमा की जमीन की मेहरागांव की बताकर कलेक्टर गाइडलाइन से कम मूल्य पर गलत शपथ पत्र देकर ई-रजिस्ट्री कराई गई थी। यह खुलासा पंजीयन विभाग की जांच में हुआ है। विभाग रजिस्ट्री के दौरान अपलोड किए गए मूल दस्तावेज जुटा रहा है। ताकि कानूनी कार्रवाई की जा सके।

मामले को सबसे पहले भोपाल में महानिरीक्षक पंजीयन दीपाली रस्तोगी ने पकड़ा था। जांच के आदेश दिए थे। जांच में कई तथ्य सामने आने पर पंजीयन विभाग ने क्रेता-विक्रेता को दोषी माना है। उनके खिलाफ प्रकरण दर्ज किया जा चुका है। सर्विस प्रोवाइडर को भी नोटिस दिया है। अभी उस पर कार्रवाई नहीं हुई है।

क्या था मामला

भोपाल की जेएसवी डेवलपर्स लिमिटेड कंपनी की विजयलक्ष्मी कठैत ने इटारसी के वार्ड नंबर 19 में स्थित जमीन (रसैलपुर) के राहुल सिंह तोमर को बेची थी। रजिस्ट्री कराते समय जमीन मेहरागांव में दर्शाई गई। जमीन 0.327 हेक्टेयर थी। जमीन का बाजार मूल्य 3.43 करोड़ रुपए था। नियम के मुताबिक बाजार मूल्य के आधार पर पंजीयन श्ुल्क निर्धारित करना था लेकिन सब-रजिस्ट्रार राजेंद्र सिंह बघेल ने कठैत द्वारा जमीन की बताई कीमत 49.10 लाख के आधार पर रजिस्ट्री सत्यापित कर दी। यह रजिस्ट्री 1 जनवरी 2016 की गई थी। इसी तरह इटारसी के ही वार्ड नंबर 19 स्थित 0.186 हेक्टेयर जमीन की रजिस्ट्री बद्रीलाल दांगी ने 23 जनवरी 16 को राहुल सिंह के पक्ष में की थी।

वास्तव में इस जमीन की कीमत 1.95 करोड़ रुपए थी लेकिन बद्रीलाल डांगी ने जमीन गांव की और कीमत 38.10 लाख बताकर रजिस्ट्री करवा ली। दोनों ही मामलों में यह छिपाया गया कि जमीन नगरीय क्षेत्र में स्थित है। अगर यह बता दिया जाता तो गाइडलाइन अधिक बनती और सरकार को करीब 40 लाख रुपए का पंजीयन शुल्क चुकाना पड़ता। यहां गांव की जमीन दर्शाने से पंजीयन शुल्क करीब 6.16 प्रतिशत के हिसाब से 5.35 लाख रुपए बना। इस तरह करीब 35 लाख का नुकसान हुआ।

31 जनवरी को प्रकाशित खबर

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