450 डेयरियों के विस्थापन के लिए स्थान
एन्वायर्नमेंट रिपोर्टर | भोपाल
नगर निगम ने अशाेका गार्डन स्थित डेयरी के खिलाफ कार्रवाई की और वहां के पशुओं को कांजी हाउस में बंद कर दिया गया था। लेकिन रसीद काटकर छोड़ने के बाद वे पशु वापस डेयरी में ही भेज दिए गए। यह खुलासा मंगलवार को याचिकाकर्ता के वकील ने किया। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने इस पर नाराजगी जाहिर कर अगली सुनवाई में यह जानकारी प्रस्तुत करने को कहा है कि कांजी हाउस से पशुओं को छुड़ाकर कहां रखा गया है। जिला प्रशासन की ओर से बताया गया कि शहर की करीब 450 डेयरियों को विस्थापित करने के लिए पांच स्थान चिह्नित किए गए हैं। इनमें भदभदा रोड पर नाथू बरखेड़ा, कालापानी कोलार रोड, दीपड़ी होशंगाबाद रोड, परवलिया नरसिंहगढ़ रोड और अरवलिया बैरसिया रोड शामिल हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च को होगी।
डेयरी मामले में रहवासी सुशील शर्मा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई में एडीएम विकास मिश्रा व निगम की ओर से परियोजना शाखा के अधिकारी राजीव सक्सेना उपस्थित हुए।्र
डीजे मामले में आज अपना पक्ष रखेगी सरकार
डीजे मामले में राज्य सरकार बुधवार को जवाब पेश करेगी। बड़े तालाब में मैरिज गार्डन्स द्वारा फैलाए जा रहे प्रदूषण के खिलाफ दायर याचिका पर मंगलवार को हुई सुनवाई में राज्य सरकार के वकील सचिन वर्मा ने बताया कि डीजे मामले में रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। बुधवार को प्रस्तुत कर दी जाएगी। पिछली सुनवाई में एनजीटी ने कहा था कि डीजे पर लगी रोक तभी हटेगी जब राज्य शासन यह सुनिश्चित करेगी कि वो सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पालन करा सकती है या नहीं।
भेल प्रबंधन ने कहा-नहीं कटेगा एक भी पेड़
भेल द्वारा अपनी भूमि को सुरक्षित करने के लिए शक्ति नगर की तरफ दीवार बनाई जा रही है। इस दीवार को लेकर पिछले दिनों रहवासियों की शिकायत पर एनजीटी ने भेल प्रबंधन से पूछा था कि इसमें कितने पेड़ काटना पड़ेंगे। रहवासियों ने शिकायत की थी कि इस जगह दीवार बनाने से सीवेज लाइन और केबल टूटेगी। एनजीटी ने भेल से पूछा था कि दीवार बनाना क्यों जरूरी है। भेल प्रशासन ने अपने जवाब में कहा है कि दीवार बनाते समय एक भी पेड़ नहीं कटेगा। दीवार बनाना इसलिए जरूरी है, क्योंकि खाली भूमि पर अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है। भेल नगर प्रशासक प्रदीप मिश्रा के अनुसार दीवार बनाने का वही विरोध कर रहे हैं, जिन्होंने मकान के आगे या पीछे 15 से 20 फीट तक जमीन पर कब्जा किया है। जबकि रहवासियों का कहना है कि यहां से निकल रहे नाले को सीमेंट से पक्का कर दे। इससे गंदगी खुली भूमि पर नहीं फैलेगी और वहां कब्जे भी नहीं हो सकेंगे। साथ ही ऐसा करने से एक भी पेड़ नहीं काटना पड़ेगा।