मलबरी रेशम में होशंगाबाद अव्वल
भास्कर संवाददाता | होशंगाबाद
मलबरी रेशम पैदा करने में प्रदेश में टॉप पर रहने का होशंगाबाद का तमगा इस साल भी बरकरार है। 10 साल से होशंगाबाद मलबरी रेशम पैदा करने में अव्वल बना हुआ है। इस साल होशंगाबाद ने 5 लाख किलो ककून पैदा कर एक बार फिर प्रदेश में अपने नाम किया है। बैतूल ने 1 लाख 30 हजार किलो ककून पैदा कर दूसरा स्थान हासिल किया है। पिछले साल यह रिकार्ड विदिशा के नाम था। ककून उत्पादन से किसानों की स्थिति मजबूत हो रही है।
भोपाल में समीक्षा बैठक में यह आंकड़े सामने आए हैं। फायदा दोनों जिलों के ककून उत्पादक किसानों को होगा। बैतूल में यह पैदावार केवल एक फसल (अप्रैल 2015 से जनवरी 2016 तक) की है। मार्च-अप्रैल में आने वाली अगली फसल में उत्पादन 2 लाख किलोग्राम की संभावना है।
गेहूं का विकल्प होगी रेशम की खेती
फील्ड ऑफिसर के मुताबिक रेशम की खेती को अपना कर किसान सोयाबीन और गेहूं फसल में होने वाले घाटे से बच सकते हैं। इसमें फायदा अधिक और नुकसान की गुंजाइश कुछ भी नहीं है। इसका दूसरा बड़ा फायदा यह है कि फसल पर मौसम का ज्यादा असर नहीं पड़ता।
एक एकड़ में 1.80 लाख कमाई
मलबरी ककून से किसानों को अच्छी खासी इनकम होती है। अभी मलबरी ककून 70 से लेकर 270 रुपए प्रति किलोग्राम बिक रहा है। औसत दाम 225 रुपए है। एक एकड़ जमीन में एक बार में 2 क्विंटल ककून बनता है। एक साल में चार बार तक कनून निकाला जा सकता है।
होशंगाबाद: 3500 किसान, 3 हजार एकड़ में पैदावार
रेशम विभाग के फील्ड ऑफिसर रवींद्र सिंह ने बताया जिले में 35 सौ किसान मलबरी ककून की खेती करते हैं। इसका रकबा करीब 3 हजार एकड़ है। इसमें से 5 लाख किलो ककून पैदा हुआ है। मलबरी ककून पैदा करने में जिला प्रदेश भर के सभी जिलों में अव्वल रहा है। किसानों की मेहनत झलक रही है।
बैतूल: 800 किसान, 800 एकड़ में रेशम का उत्पादन
रेशम के क्षेत्र में बैतूल के किसानों की रुचि बढ़ रही है। 800 किसानों ने रेशम की खेती को अपनाया है जो करीब 800 एकड़ में मलबरी रेशम की खेती करते हैं। टसर, ईरी का भी रकबा बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। पहली बार मलबरी रेशम ककून उत्पादन में बैतूल ने प्रदेश के अन्य जिलों को पीछे छोड़ा है।
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