निदा फाजली का होशंगाबाद से गहरा नाता, बसने की जताई थी इच्छा
भास्कर संवाददाता | होशंगाबाद
देश के मशहूर शायर निदा फाजली का होशंगाबाद से भी गहरा नाता रहा है। वे यहां 24 मई 2013 को माधव ज्योति अलंकरण समारोह में आए थे। यहां उन्हें सम्मानित किया गया था। वे यहां आए तो एक दिन के लिए थे लेकिन होशंगाबाद इतना भाया कि वे एक दिन और यहां ठहर गए। वे शहर घूमे तो उन्हें होशंगाबाद इतना भाया कि यहां बसने की इच्छा जताई थी। होशंगाबाद में वे साहित्यकार अशोक जमनानी के घर रुके थे। घर पर उन्होंने अपने जीवन से जुड़ी कई बातों का जिक्र भी किया। जमनानी ने बताया निदा फाजली ने घर पर एक गजल (वक्त के साथ है मिट्टी का सफर सदियों से, किसको मालूम कहा के हैं किधर के हैं, सुनाई थी) उन्होंने परिवार की फरमाइश पर सुनाई थी। पान भी अच्छे लगे कि वे आधा दर्जन पान साथ ले गए।
जमनानी की कलम से फाजली: मेरे साथ उन्होंने कई घंटे बिताए। मैंने फ़िल्म सरफ़रोश के मशहूर गीत ‘ होश वालों को ख़बर क्या बेख़ुदी क्या चीज़ है ‘ की प्रेरणा के बारे में पूछा तो उन्होंने कबीर के’ हमन हैं इश्क़ मस्ताना हमन को होशियारी क्या’ का ज़िक्र किया। यह कहते हुए कि आज के दौर की समस्या ज़रूरत से ज़्यादा होशियारी है। इसलिए लिखा’ होश वालों को ख़बर क्या बेख़ुदी क्या चीज़ है’ भोजन के बाद छोटी बहन ने उनसे कहा कि उसे सैलाब की ग़ज़ल ‘ अपनी मर्ज़ी से कहां अपने सफर के हम हैं ‘ बेहद पसंद है तो निदा साहब देर तक गुनगुनाते रहे। फिर हमें इटारसी जाना था जहां से उन्हें ट्रेन पकड़नी थी। रास्ते में उन्होंने पान की फरमाइश की और पान मुंह में घुलते ही अपनी मर्ज़ी से ... ग़ज़ल की फिर से शुरुआत हो गई। उन्होंने गीता और ग़ालिब को जोड़ते हुए एक बहुत बेहतरीन तफ़्सीर पेश की। काश मैं उसे रिकॉर्ड कर पाता। बहुत-सी बातें होती रहीं फिर उनकी ट्रेन आई तो लगा कि एक बेहतरीन दिन ख़त्म हो रहा है... एक यादगार दिन बनकर ...और हां मैंने पूछा कि आपके लिए साहित्य क्या है तो उन्होंने मुस्करा कर कहा ‘आदमियों के जंगल में इंसान की तलाश’।
निदा फाजली से चर्चा करते जमनानी।
खुद के खर्च पर रुके
शायर फाजली ने जीवन को बहुत नजदीक से जिया। अलकंरण समारोह के आयोजक राजेंद्र ठाकुर ने बताया जब वे यहां एक दिन रुके तो स्वयं के खर्च पर रुके। उन्होंने यह अहसास नहीं होने दिया कि वे बड़ी हस्ती हैं। उन्हें फाइव स्टार होटल में रुकने का शौक नहीं था। उन्होंने एक बार ओर होशंगाबाद आने की इच्छा जाहिर की थी लेकिन ये अधूरी रह गई।