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प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में होशंगाबाद, बैतूल व हरदा शामिल

5 वर्ष पहले
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प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में नर्मदापुरम संभाग के होशंगाबाद, बैतूल और हरदा जिले को शामिल कर लिया है। इससे सिंचाई का रकबा बढ़ेगा, नए तालाब बनेंगे, पुराने तालाबों में सुधार होगा। नहरें पक्की होंगी। ऐसे क्षेत्रों में भी सिंचाई की संभावना बनेगी, जहां अभी कोई साधन नहीं है। योजना में प्रदेश के 29 जिले शामिल किए गए हैं। इसमें नर्मदापुरम संभाग के तीनों जिले शामिल हैं।

ऐसा होगा प्रस्ताव : वर्तमान सिंचाई सुविधा, निजी सिंचाई के स्रोत, सिंचाई का रकबा और असिंचित जमीन की स्थिति। बड़े-छोटे पेयजल स्रोतों की जानकारी और पिछले 10 सालों में रख-रखाव की योजना का जिक्र, आने वाले सालों में वर्तमान सिंचाई सुविधा के विस्तार का पूरा आकलन और इसमें आने वाले खर्च का अनुमान, तालाबों से सिंचाई का रकबा, तालाबों की उम्र, नहरों की लंबाई, उनकी स्थिति, कच्ची है या पक्की इसकी जानकारी, उनके विस्तार की जरूरत, नए तालाब बनाने की संभावना और उससे लाभान्वित होने वाले रकबे की जानकारी, तालाब निर्माण के लिए बड़ी नदियों की जानकारी जैसे बिंदुओं पर प्रस्ताव तैयार होगा।

बड़ा रकबा तवा से सिंचित, फिर भी जरूरत
होशंगाबाद-हरदा में बड़ा रकबा तवा परियोजना सिंचित है। होशंगाबाद की केसला पट्टी सूखा प्रभावित है। निजी साधनों से सिंचाई होती है। सिवनीमालवा में गंजाल नदी पर डेम बनाकर 15 से 20 हजार हेक्टेयर रकबे को सिंचित किया जा सकता है। केसला में योजना की जरूरत है। हरदा के सिराली के पास नानी मकड़ाई सिंचाई योजना की जरूरत है।

बैतूल को सबसे ज्यादा जरूरत
कृषि रकबा 4 लाख हेक्टेयर है। आधे में भी गेहूं की बोवनी नहीं होती। ज्यादातर हिस्से में चने की बोवनी होती है। गेहूं का बड़ा रकबा निजी साधनों से सिंचित है। जिले में तालाब है लेकिन तवा परियोजना जैसी बड़ी योजना नहीं है। तालाब छोटे हैं। लाखों हेक्टेयर जमीन पर गेहूं की बोवनी नहीं होती। फसलें पानी की कमी के कारण प्रभावित होती हैं। ताप्ती नदी पर पारसडोह डेम, माचना पर गढ़ा डेम की सख्त जरूरत है। सर्वे हो चुका है।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में होशंगाबाद, हरदा और बैतूल को शामिल किया है। प्रस्ताव शासन ने मंगाए हैं। बैठकें हो चुकी हैं। प्रस्तावों को स्वीकृति मिलने के बाद जिलों में सिंचाई का रकबा बढ़ेगा, किसानों को फायदा होगा। - बीएल बिलैया, ज्वाइंट डॉयरेक्टर एग्रीकल्चर

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