सत्रह की जगह पढ़ाए जा रहे 9 रेलवे जोन
देश में 17 रेल जोन बन चुके हैं लेेकिन प्रदेश के स्कूलों में छटवीं कक्षा के हजारों छात्र-छात्राओं को 9 जोन ही पढ़ाए जा रहे हैं। गलत पाठ पढ़कर बच्चे अगली कक्षाओं में पहुंच रहे हैं। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की बात तो दूर इस गलती को मप्र राज्य शैक्षणिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद भी नहीं पकड़ सकी है। हैरत की बात है कि पाठ्य पुस्तक में छप रही गलती हर साल दोहराई जा रही है।
मप्र राज्य शिक्षा केंद्र से प्रकाशित सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में भारत में परिवहन के साधन शीर्षक से पाठ नंबर 27 है जिसमें सड़क, रेल, जल और वायु मार्ग की जानकारी नक्शे सहित बच्चों को पढ़ाई जा रही है। पुस्तक के ताजे संस्करण में पेज पर 171 पर रेलवे के बारे में भ्रामक व तथ्यहीन जानकारी छपी है। इसमें लिखा है, देश के समस्त रेलमार्गों को 9 जोन में बांटा गया है।
असलियत यह है कि भारतीय रेल बोर्ड ने एक अप्रैल 2003 से रेल जोनों की संख्या 9 से बढ़ाकर 16 कर दी। फिर 29 दिसंबर 2010 में कोलकाता रेलवे मेट्रो के लिए 17वां रेल जोन भी बन चुका है।
प्रदेश के सबसे बड़े रेल जंक्शन इटारसी में सरकारी मिशनखेड़ा मिडिल स्कूल के एक शिक्षक राजकुमार दुबे कहते हैं, सामाजिक विज्ञान की पाठ्य पुस्तक में रेल जोन की संख्या 9 लिखी है। सारे स्कूलों में यही गलत-सलत पढ़ाया जा रहा है। हमें भी रेल अधिकारियों से बात करने पर पता चला कि रेल जाेन 17 हैं।
इटारसी | मिशनखेड़ा मिडिल स्कूल में सामाजिक विज्ञान पढ़ते छटवीं के विद्यार्थी।
आपने ऐसी गलती की ओर ध्यान दिलाया है जो पहले ही सुधर जानी थी। हम तत्काल पाठ्यक्रम सेल को इस चूक के बारे में बताएंगे। ताकि बच्चों को रेल जोन की सही जानकारी मिल सके। अमिताभ अनुरागी, पीआरओ राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल
राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल की पाठ्य पुस्तक में रेल जाेन 9 बताना गंभीर त्रुटि है। इससे बच्चों को रेलवे के बारे में गलत जानकारी मिल रही है। इसमें तत्काल संशोेधन होना चाहिए। आईए सिद्दिकी, पीआरओ पमरे भोपाल मंडल
लापरवाही