भास्कर संवाददाता | सोहागपुर
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आत्मा को परमात्मा की जरूरत है वह भक्ति मार्ग से ही संभव है। भगवान राम के आदर्श चरित्र से सभी को प्रेरणा लेना चाहिए। यह बात स्वामी डॉ. रामकमल दास वेदांती ने भागवत के पांचवे दिन कही। वे सिविल कोर्ट के पास संगीतमय प्रस्तुति दे रहे हैं। उन्होंने कहा मानव समाज आध्यात्मिकता से दूर होता जा रहा है, जिससे समाज में विकृतियां जन्म ले रहीं हैं। समाज में चरित्रहीनता और मर्यादा का हनन हुआ है जिस वजह से आतंकवाद एवं बलात्कार जैसी घटनाएं हो रही हैं।
शनिवार को वनम स्कंध का वर्णन करते हुए डॉ. वेदांती ने बताया इस स्कंध में राजाओं के चरित्र का वर्णन है। राजाओं ने भी पहले बुरे काम किए, बाद में पछतावा होने पर श्रेष्ठ जीवन चरित्र को अपनाते हुए भगवत भक्ति प्राप्त की। उन्होंने ऋषि सौरभ का उदाहरण देते हुए कहा ऋषि ने यमुना में मत्स्य की कामक्रीड़ा को देखकर वासना में राजा मान्धाता की 50 कन्याओं से शादी कर ली बाद में अपने को धिक्कारते हुए काम, क्रोध, लोभ को त्यागते हुए भक्ति मार्ग अपनाया और भगवत कृपा प्राप्त की। भागवत कथा का समापन 17 फरवरी को होगा।