इंदौर. श्वेतांबर जैन समाज की 12 वर्षीय दीक्षार्थी अर्पिशा संघवी ने बुधवार को सांसारिक जीवन को त्यागकर वैराग्य की राह अपना ली। अर्पिशा विघांजलि इंटरनेशनल स्कूल में सातवीं कक्षा में पढ़ती हैं। स्कूल में हमेशा टॉप करने वाली अर्पिशा ने सांसारिक जीवन छोड़ दीक्षा लेने का फैसला किया। वह दुल्हन की तरह सजकर आई और वैराग्य अपना लिया। दीक्षार्थी का नया नाम पंक्तिपूर्णा श्रीजी हो गया। दीक्षा समारोह आचार्य हेमचंद्रसागर सूरीश्वर महाराज, 19 साधु व 44 साध्वियों की निश्रा में कालानी नगर स्थित नवनिर्मित जिनालय में संपन्न हुआ।
श्री श्वेतांबर जैन मूर्तिपूजक श्रीसंघ कालानी नगर अध्यक्ष शांतिप्रिय डोसी व दिलीप भंडारी ने बताया दीक्षार्थी ने अल्पायु से ही नवकारसी शुरू कर दी थी। दो साल से निरंतर गर्म पानी पीना, अट्ठाई, नवपद वर्ण की ओली शुरू कर दी थी। समारोह में केशलोच के साथ अन्य रस्में भी विधि-विधान के साथ की गईं। इसके बाद दीक्षार्थी ने सांसारिक जीवन त्यागकर वैराग्य की राह अपना ली। इस मौके पर सैकड़ों भक्त मौजूद थे। मंदिर का प्रतिष्ठा समारोह 14 से 21 फरवरी तक होगा।
इंदौर में रथ पर मां ने निकाली यात्रा
वैराग्य से पहले मां ने बेटी को रथ पर बैठाकर यात्रा निकाली थी, जिसमें अर्पिशा की स्कूल दोस्त भी साथ रहे। मां के साथ-साथ पूरा परिवार भी अर्पिशा के साथ था।
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