इंदौर. 2014 में इंदौर जोन के 9 जिलों में सैकड़ों गुंडों पर पुलिस ने प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की। एसडीएम ने उनसे अपराध नहीं करने के लिए बांड भरवाए। इनमें इंदौर पश्चिम जिले के 126 गुंडों ने कानून का मजाक उड़ाया और बांड के बाद भी बेखौफ होकर अपराध किए। पुलिस इसके लिए प्रशासन को जिम्मेदार ठहरा रही है और प्रशासन पुलिस को।
इंदौर जोन के इंदौर पूर्व, इंदौर पश्चिम, धार, झाबुआ, आलीराजपुर, खरगोन, खंडवा, बड़वानी और बुरहानपुर के गुंडों पर हुई कार्रवाई का भास्कर ने एनालिसिस किया। इसमें खुलासा हुआ कुल 215 गुंडों ने प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के बाद भी अपराध किए।
इसमें सबसे बड़ा आंकड़ा इंदौर पश्चिम जिले का है। इस इलाके के 126 गुंडों ने बांड तोड़े। पुलिस ने उनकी बांड राशि जब्त करने के लिए संबंधित एसडीएम को पत्र भेजा लेकिन जब तक कार्रवाई हो पाती बांड अवधि ही खत्म हो गई।
क्या है बांड की अहमियत
पुलिस आदतन अपराधियों पर धारा 107-16 के तहत बांड भरवाने के लिए प्रकरण संबंधित एसडीएम कोर्ट में पेश करती है। नियमानुसार एसडीएम को कम से कम 3 साल के लिए बांड ओवर करना चाहिए। इसकी राशि भी ज्यादा हो। ऐसे में अगर गुंडा बांड तोड़ता है तो राशि जब्त होती है और बाकी अवधि के लिए उसे जेल में रहना पड़ता है।
हत्या करने वाले को भी बख्शा
एसपी आबिद खान ने बताया पिछले दिनों किशनगंज में आरएसएस कार्यकर्ता की हत्या हुई थी। हत्या करने वाले मो. सोहेल पर 12 अपराध थे और पुलिस ने उसे जिलाबदर करने का प्रस्ताव भेजा था। एसडीएम ने उसे जिलाबदर करने की बजाए एक लाख का बांड ओवर कर दिया। इसका उल्लंघन करते हुए उसने हत्या कर डाली। हम पत्राचार करते रह गए लेकिन उसकी बांड राशि तक जब्त नहीं हुई।
एसडीएम नहीं करते फाइनल बाउंड ओवर
गुंडों पर फाइनल बांड ओवर के लिए कमिश्नर, कलेक्टर से तीन बार बात की। फिर भी हालत जस के तस है। 215 गुंडों पर कार्रवाई की जानकारी ले रहे हैं। एसडीएम फाइनल बाउंड ओवर नहीं करते। यह नहीं किया जाएगा, तब तक कानून का डर गुंडों में नहीं दिखेगा।
-विपिन माहेश्वरी, आईजी