पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

13 दिन तक सीने में धंसा रहा हिंगोट, ऑपरेशन कर निकाला

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
गौतमपुरा. धोक पड़वा पर हुए हिंगोट युद्ध में घायल युवक के इलाज में एमवाय के डॉक्टरों की लापरवाही सामने आई है। युवक आठ दिन तक अस्पताल में भर्ती रहा लेकिन डॉक्टरों को सीने में धंसा हिंगोट दिखाई नहीं दिया। युवक को इलाज के बाद छुट्‌टी दे दी गई। बाद में घाव वाले स्थान पर सूजन आई तो पता चला हिंगोट अंदर ही धंसा हुआ था। डॉक्टरों ने 13 दिन बाद ऑपरेशन कर हिंगोट निकाला।
युद्ध में 77 लोग घायल हुए थे। इस बीच रूणजी के यौद्धा जगदीश पिता प्रतापजी के दाएं सीने में हिंगोट लगा था। युद्ध मैदान के बाहर तैनात डॉक्टरों की टीम ने युवक का प्राथमिक इलाज कर उसे एंबुलैंस 108 से एमवाय अस्पताल इंदौर भेज दिया था। यहां तीसरी मंजिल पर वार्ड 12 में भर्ती कर उसका इलाज किया गया। यहां युवक का एक्सरे भी किया गया और घाव के स्थान पर टांके लगाकर हर तीसरे दिन ड्रेसिंग कर बॉटल भी चढ़ाई गई। 31 अक्टूबर को उसे पूर्ण स्वस्थ बताते हुए अस्पताल से छुट्‌टी दे दी गई।
युवक ने एमवाय के डॉक्टरों के निर्देश पर गौतमपुरा में आगे इलाज जारी रखा। 6 नवंबर को गुरुवार को युवक के सीने में दर्द होने लगा और सूजन बढ़ गई। टांके की जगह से मवाद व खून बहने लगा। स्थानीय डॉक्टर दिलीपसिंह ने बताया टांके काटकर देखा तो सीने में हिंगोट फंसा था। उन्होंने हिंगोट निकालकर ड्रेसिंग के लिए इंदौर भेज दिया।