आगर-मालवा. महज 16 साल की उम्र में जहां बच्चे आईआईटी की तैयारी करने का मन बनाते हैं, वहीं छोटी उम्र में आगर के 11वीं के छात्र दिव्य गर्ग ने आईआईटी की तैयारी पर 272 पेज की प्रेरणादायी पुस्तक लिख दी। पुस्तक का नाम लाइफ एट द रेस टू आईआईटी है। इसमें दिव्य ने आईआईटी की तैयारी कर रहे युवाओं को आने वाली जटिल परेशानियों को सरल शब्दों में समझाते हुए महत्वपूर्ण टिप्स बताए हैं।
पुस्तक 20 नवंबर को नई दिल्ली के प्रकाशक ओम पब्लिशिंग हाउस प्रालि से प्रकाशित होकर बाजार में भी आ चुकी है। दिव्य ने दो वर्ष तैयारी कर युवाओं की समस्याओं को करीब से जाना और गहराई तक अध्ययन किया। अपनी पुस्तक में ऐसी ही बारीकियों को दर्शाते हुए उन्हें दूर करने के उपाय बताए हैं।
इसमें दो दोस्तों आर्यन अग्रवाल और सिद्धांत गुप्ता की कहानी हैं और दोनों
की आईआईटी की तैयारी के बीच आने वाली बाधाएं बताते हुए कामयाबी हासिल करने के लिए युवाओं का जो जज्बा दर्शाया है, वह निश्चित ही युवाओं के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं। इसमें युवाओं को लक्ष्य प्राप्ति के रास्ते बताए हैं। मई-2012 में शुरू की पुस्तक एक साल बाद मई-13 में पूरी की। नई दिल्ली के पब्लिशर से एग्रीमेंट के बाद यह पुस्तक प्रकाशित हुई। पब्लिशर गौरवकुमार शर्मा के अनुसार पुस्तक की कीमत 169 रु. है, जो ऑनलाइन मिलना शुरू भी हो गई है। अब तक दर्जनों लोगों ने इसे खरीदा है। दिसंबर के अंत तक मांग के अनुसार पुस्तक देश के सभी बड़े शहरों के सहित श्रीलंका और नेपाल में भी उपलब्ध हो जाएगी।
यह रहा पुस्तक लिखने का उद्देश्य
दिव्य ने बताया प्रारंभ में आईआईटी की तैयारी करने का मन बनाया। पुस्तकों को खोजा, लेकिन एक भी पुस्तक ऐसी नहीं मिली, जिसमें तैयारी के दौरान आने वाली परेशानी और उतार-चढ़ाव को बारीकी से बताया हो। ऐसे में मन में इच्छा हुई कि इस पर कुछ किया जाए। रिसर्च के दौरान कई ऐसे युवाओं से संपर्क हुआ जो आईआईटी की तैयारी कर रहे थे। उनके जीवन से जुडे़ पहलुओं और आने वाली जटिल परेशानियों को करीब से जानने के बाद यह पुस्तक लिखी। पुस्तक में परिवारजनों के साथ कुछ लेखकों ने भी दिव्य का मार्गदर्शन किया।
लेखक बन प्रेरणा देने की चाहत
श्री संस्कार एकेडमी स्कूल में कक्षा 11वीं में अध्ययनरत दिव्य लेखक बनकर समाज सुधार के साथ ही विद्यार्थियों को भी प्रेरणा देने की दिशा में प्रयास करना चाहता है। दिव्य के पिता की छावनी नाका पर स्टेशनरी की दुकान है और माता गृहिणी होकर उसकी पढ़ाई-लिखाई में पूरी तरह ध्यान देती है। एक छोटी बहन कांची है।
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