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डाउनलोड करेंइंदौर. ज्यादती के 303 मामलों में सजा सिर्फ 46 मामलों में ही मिली। कोर्ट से आरोपियों के बरी होने की मुख्य वजह पुलिस जांच में लापरवाही और गवाहों का मुकरना है। यह बात इंदौर जोन की महिला सेल की आईजी आशा माथुर ने मीडिया से चर्चा के दौरान कही। उन्होंने कहा कि वर्ष 2013 में निराकृत इंदौर जिले के प्रकरणों की स्थिति देखने से पता चलता है कि कोर्ट में प्रस्तुत 303 बलात्कार के मामलों में सिर्फ 46 को सजा मिली जबकि 117 बरी हो गए और 13 में राजीनामा हुआ। वहीं शीलभंग के 146 प्रकरण कोर्ट में पेश हुए। 25 लोगों को सजा मिली जबकि 38 बरी हुए और 118 मामलों में राजीनामा हो गया। आरोपियों के बरी होने के पीछे पुलिस की जांच में लापरवाही और गवाहों के पलटने की बात सामने आई है। पुलिस ने अब इस पर भी ध्यान देना शुरू कर दिया है, ताकि लापरवाह जांच अधिकारियों पर कार्रवाई की जा सके।
आईजी ने पलासिया में ज्यादती के झूठे आरोप में आत्महत्या करने वाले रूपकिशोर अग्रवाल का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा पुलिस को इस बात का ध्यान रखने की जरूरत है कि महिलाओं के खिलाफ अपराध की सही छानबीन हो ताकि मदद के लिए बने प्रावधान निर्दोष के खिलाफ कानूनी हथियार न बन सकें।
30 साल पहले बहुत सुरक्षित था इंदौर
आईजी माथुर ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा 30 साल पहले मैं इंदौर में पीएससी परीक्षा के लिए आई थी, तब पुलिस में नहीं थी। हम 9 से 12 का नाइट शो देखने जा रहे थे। मैंने हमारे परिचित से पूछा कि क्या महिलाएं यहां रात में निकल सकती हैं। हमारे यूपी मैं तो यह संभव नहीं। उनका जवाब सुन मुझे आश्चर्य हुआ। महिलाएं रात 12 बजे तक न सिर्फ बेखौफ आ-जा रही थीं बल्कि गहने भी पहने थीं।
ऐसे बदलेंगे हालात
आईजी ने कहा प्रकोष्ठ के स्तर पर वे संबंधित विभागों की लगातार कार्यशालाएं आयोजित कर रही हैं। घरेलू हिंसा के मामलों में महिला एवं बाल विकास विभाग के संरक्षण अधिकारियों व दहेज प्रतिषेध अधिकारी को अपनी भूमिका समझकर कार्रवाई करना होगी।
इंदौर जिले में तीन साल में महिलाओं पर हुए अपराध
वर्ष हत्या हत्या का अपहरण आत्महत्या के लिए दहेज हत्या दहेज प्रताडऩा बलात्कार शीलभंग कुल
प्रयास उत्प्रेरित करना
2011 32 20 61 32 38 398 119 373 1073
2012 26 19 57 30 26 425 151 4 1211
2013 27 18 326 30 27 353 166 436 1383
अपहरण के मामलों में इतनी बढ़ोत्तरी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत नाबालिग के लापता होने में
दर्ज किए जा रहे प्रकरण को लेकर है।
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