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स्कीम-155 में 847 फ्लैट, दो साल में 19 ही बिके, तीसरी बार बुलाएंगे टेंडर

7 वर्ष पहले
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इंदौर. टिगरिया बादशाह और छोटा बांगड़दा के बीच स्कीम 155। आईडीए ने यहां 11 करोड़ की जमीन पर 89 करोड़ रु. में 847 फ्लैट बनाए। दो साल में दो बार टेंडर प्रक्रिया की। पहले आएं-पहले पाएं के आधार पर ड्राॅ सिस्टम निकाला, लेकिन 19 फ्लैट ही बिके। इनमें 12 फ्लैट ड्रॉ सिस्टम के हैं। ज्यादा रेट और बढ़ी हुई गाइडलाइन इसके प्रमुख कारण हैं। ऐसी परिस्थिति में प्राधिकरण अब तीसरी बार टेंडर बुलाएगा।
प्राधिकरण ने 15.73 हेक्टेयर (38.88 एकड़) जमीन में से 6.78 एकड़ पर अफोर्डेबल हाउसिंग का प्रोजेक्ट वर्ष 2010 में शुरू किया था। 2012 में 12 ब्लॉक में यह तैयार भी हो गया, लेकिन गाइडलाइन में इस क्षेत्र के शामिल नहीं होने से आईडीए करीब एक साल तक फ्लैट के रेट नहीं तय कर पाया। इस बीच, आसपास के क्षेत्रों की गाइडलाइन बढ़ गई।
मजबूरन आईडीए को 1-बीएचके फ्लैट के रेट 19 लाख रु. तक करना पड़े। इतनी कीमत के कारण लोग फ्लैट नहीं खरीद रहे हैं।
प्रोजेक्ट फेल होने का अन्य बड़ा कारण इसका सुपर कॉरिडोर और एयरपोर्ट के बीच में होना है, जहां बड़ा एप्रोच रोड नहीं है। हालांकि बोर्ड बैठक में सड़क बनाने का फैसला लिया गया है। संभावना है कि इसके बाद यहां के फ्लैट की मांग बढ़े, लेकिन सड़क बनने में एक साल से ज्यादा लगेगा।
नाम अनुकूल, साबित हुआ प्रतिकूल
आईडीए ने इस प्रोजेक्ट को अनुकूल नाम दिया था, लेकिन समय के साथ इतना महंगा साबित हो गया। फिलहाल प्राधिकरण की एक बड़ी रकम इसमें अटक गई है। यह राशि कब और कैसे वसूल होगी, इसे लेकर बोर्ड में भी संशय है।
प्लॉटों को बाद में बेचने की योजना
स्कीम में 500 से तीन हजार वर्गफीट तक के 151 प्लॉट भी काटे गए हैं। हालांकि प्राधिकरण चाहता है कि फ्लैट बिकने के बाद ही प्लॉट निकाले जाएंगे। इसका बड़ा कारण यह भी है कि प्लॉट की बिक्री आसानी से हो जाएगी।
नए नियम में कम कर सकते हैं रेट
आईडीए के जो नए व्ययन नियम हैं, उनमें यह अधिकार है कि हम शासन से अनुमति लेकर 25 प्रतिशत तक रेट कम कर सकते हैं। अगली बोर्ड बैठक में इस तरह का प्रस्ताव रखेंगे।
- विजय मालानी, संचालक आईडीए
फिर बुलाएंगे टेंडर
दो बार टेंडर हुए, लेकिन गाइडलाइन के कारण समस्या आई। अब फिर टेंडर बुलाए जाएंगे। इसके बाद जो परिणाम आएंगे, उन पर बोर्ड बैठक में विचार-विमर्श करेंगे। जरूरत पड़ने पर शासन स्तर पर भी चर्चा करेंगे।
- शंकर लालवानी, चेयरमैन आईडीए