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रैगिंग : आठ सीनियर के साथ सात जूनियर को भी होस्टल से निकाला

3 वर्ष पहले
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इंदौर। आईईटी में हुई रैगिंग की घटना पर देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने फैसला ले लिया है। प्रबंधन ने आठ सीनियर (सेकंड व थर्ड ईयर) के साथ सात जूनियर (फर्स्ट ईयर) छात्रों को भी होस्टल से निकाल दिया। सभी के हर तरह की सांस्कृतिक गतिविधियों में शामिल होने पर भी हमेशा के लिए रोक लगा दी है। यह निर्णय भी लिया कि इन छात्रों को किसी कमेटी में शामिल नहीं किया जाएगा। लेकिन इस फैसले पर सवाल उठने लगे हैं, क्योंकि पिछले साल अगस्त में यूनिवर्सिटी प्रबंधन दो होस्टल की छात्राओं को महज एक घंटे देरी से पहुंचने पर भी यही सजा (होस्टल से निकालने) दे चुका है। अब छह महीने से ज्यादा समय तक जूनियर को थप्पड़ मारने और उन्हें प्रताड़ित करने वाले छात्रों पर भी यही कार्रवाई कर दी। एक सवाल यह भी कि प्रबंधन ने सात जूनियर छात्रों पर भी वही कार्रवाई की, जो योजनाबद्ध तरीके से रैगिंग लेने वाले आठ सीनियर पर की। 

 

आरोपी जूनियर छात्रों ने रैगिंग मानी, इसलिए यही कार्रवाई 
जूनियर छात्रों पर कार्रवाई को लेकर तर्क दिया गया है कि इन सातों ने स्वेच्छा से रैगिंग स्वीकार की थी। यही नहीं, ये छात्र रैगिंग में सीनियर्स की अप्रत्यक्ष मदद करते थे। सीनियर्स के सारे निर्देश इन्हीं के जरिए जूनियर छात्रों तक पहुंचाए जाते थे। बदले में इन जूनियर छात्रों को विभिन्न सांस्कृतिक या शैक्षणिक कार्यक्रम की समिति और बाहा जैसे इवेंट के लिए बनने वाली टीम में जगह मिल जाती थी।

 

- गौरतलब है कि रैगिंग से पीड़ित छात्रों ने बयान दिया है कि सीनियर उन्हें आधी रात में भी बुलाकर थप्पड़ मारते थे। इतना ही नहीं, डायरी में इसका हिसाब रखा जाता है। शराब-सिगरेट तक उन्हीं से बुलवाई जाती थी। सीनियर ने वाट्सएप ग्रुप बना रखे थे। उसी में जूनियर को बताया जाता था कि उन्हें क्या-क्या करना है। 

 

 

पहले सख्त कार्रवाई के संकेत दिए, फिर बचाने की कवायद की 
इंस्टिट्यूट की एंटी रैगिंग कमेटी ने बुधवार सुबह एक बार फिर बचे हुए जूनियर छात्रों के बयान लिए। उसके बाद कुछ सीनियर छात्रों के बयान हुए। फिर जांच हुई। दोपहर में कुलपति और छात्र कल्याण संकाय के डीन ने संकेत दिए कि सख्त कार्रवाई होगी, लेकिन शाम हाेते-होते पूरा मामला ही बदल दिया गया। छात्रों को होस्टल से बाहर करने के साथ चेतावनी दी गई कि अगली बार रैगिंग ली तो कॉलेज से बाहर कर दिया जाएगा। बताया जाता है कि प्रमुख रूप से रैगिंग से प्रताड़ित आठ छात्रों के बयान के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर यह कार्रवाई की गई। 


वाट्स एप ग्रुप भी बने सबूत 
यूजीसी की गाइडलाइन में जो कार्रवाई बताई, वो एक भी नहीं की प्रबंधन ने यूजीसी की गाइडलाइन में स्पष्ट है कि रैगिंग का दोषी पाया जाने पर छात्र को कॉलेज से एक से छह महीने तक सस्पेंड किया जाए, या उसे बर्खास्त किया जाए। या उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। या उसे अगली परीक्षा के लिए अयोग्य घोषित किया जाए। या उसकी पुरानी परीक्षाओं के रिजल्ट निरस्त किए जाएं। इसके अलावा होस्टल से हमेशा के लिए निष्कासित किया जाए, लेकिन यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने ऐसा कुछ नहीं किया। जूनियर छात्रों के बयान, उनके वाट्सएप ग्रुप व अन्य सबूतों के बावजूद रैगिंग के दोषी छात्रों के खिलाफ इनमें से कोई कार्रवाई नहीं की। 

 

इसलिए खारिज कर दी थी यूजीसी ने कमेटी की पहली जांच रिपोर्ट 
यूजीसी की गाइडलाइन में स्पष्ट नियम है कि रैगिंग की शिकायत करने वाले छात्रों को एक-एक कर बुलाया जाए, जबकि आईईटी की एंटी रैगिंग कमेटी ने 20-20 के ग्रुप में छात्रों बुलाया था। ऐसे में छात्र सच स्वीकार नहीं कर पाए। इसके अलावा जिस वक्त एंटी रैगिंग कमेटी जूनियर छात्रों से रैगिंग का सच जान रही थी, आराेपी (जिसका शिकायत में नाम था) सीनियर छात्र गेट पर ही खड़ा होकर सबकुछ सुन रहा था। यह खुलासा होने के बाद यूजीसी ने कमेटी की जांच रिपोर्ट को खारिज करते हुए फिर से रैगिंग से प्रताड़ित छात्रों के बयान लेने व जांच करने के निर्देश दिए थे। 


डायरेक्टर बोले- जूनियर भी रैगिंग के बराबर हिस्सेदार थे 
आईईटी के डायरेक्टर डॉ. संजीव टोककर का कहना है कि सात जूनियर भी रैगिंग में बराबर के हिस्सेदार थे। जहां तक कड़ी कार्रवाई का सवाल है, प्रकरण के आधार पर एंटी रैगिंग कमेटी ने सर्वानुमति से यह निर्णय लिया है। 



- एंटी रैगिंग कमेटी ने गंभीरता से जांच की। कमेटी में हर क्षेत्र के सदस्य हैं। सभी ने मिलकर निर्णय लिया। - डॉ. नरेंद्र धाकड़, कुलपति डीएवीवी 

 

 

विशेषज्ञ भी बाेले, सोच-समझकर लेना था निर्णय, कहीं न कहीं चूक हुई है 
- प्रो. मंगल मिश्र का कहना है कि इस मामले में दोषी जूनियर और सीनियर पर एक जैसी कार्रवाई चौंकाने वाली है। यूजीसी की गाइडलाइन के अनुसार रैगिंग लेने वाले पर सख्त कार्रवाई होना चाहिए। इसमें एफआईआर और निलंबन जैसे सख्त कदम शामिल हैं। वहीं, जूनियर ने अगर गलती है तो उन्हें होस्टल से निकाला जा सकता है। 

 

- प्रो. रमेश मंगल का कहना है कि ऐसे मामले में निर्णय सोच-समझकर लिया जाना चाहिए। इस मामले में कहीं न कहीं चूक हुई है। 


 

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