सात दिन में भी केस दर्ज नहीं कर सकी पुलिस
30 प्रतिशत ब्याज का झांसा देकर ऑनलाइन ठगी करने वाली क्यू-7 कंपनी के कर्ताधर्ताओं पर इंदौर पुलिस अब तक केस दर्ज नहीं कर सकी। अहमदाबाद पुलिस ने ब्रांच ऑफिस होने के बावजूद दूसरे ही दिन केस दर्ज कर लिया था। ठगी के शिकार लोगों का आंकड़ा ढाई से ज्यादा हो चुका है।
4 फरवरी को क्यू-7 कंपनी से ठगाए लोगों ने तुकोगंज थाने पर शिकायत की थी। पुलिस ने दफ्तर और कंपनी के तीन बैंक खाते सील कर दिए। इसकी जांच क्राइम ब्रांच को भी सौंपी गई। कंपनी के संचालक जाफर अली मोहम्मद अली व सिद्धार्थ रामास्वामी अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। इस कंपनी के दफ्तर सूरत, कोटा, अहमदाबाद सहित कई शहरों में हैं, लेकिन हेड ऑफिस इंदौर में है। अहमदाबाद पुलिस ने मामले का खुलासा होने के दूसरे दिन ही जाफर अली, सिद्धार्थ, आदित्य विश्वनाथ, नंद कुमार एवं विश्वप्रसाद राव के खिलाफ केस दर्ज कर लिया था। इंदौर पुलिस अभी तक जांच पूरी नहीं कर पाई है। पुलिस को निवेशकों ने कंपनी द्वारा दी गई राशि की रसीदें प्रस्तुत की हैं। इसके आधार पर पूरा डाटा एकत्र किया जा रहा है। इन रसीदों के आधार पर पीड़ितों की संख्या 250 से ज्यादा हो चुकी है और काउंटिंग अभी भी चल रही है। इसके बावजूद केस दर्ज नहीं हो सका।
जल्द ही निर्णय लेंगे
ठगी की राशि ज्यादा होने के साथ दूसरे शहरों से भी संपर्क होना पता चला है। इसमें ऑनलाइन एड से हुई जालसाजी के कारण यह मामला ईओडब्ल्यू को भी सौंपा जा सकता है। इसे लेकर जल्द ही निर्णय लिया जाएगा।