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जीवन को संवारने के अनमोल रत्न भरे पड़े हैं भागवत कथा में

5 वर्ष पहले
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भागवत ग्रंथ ऐसा महासागर है जिसमें जीवन संवारने के अनेक बहुमूल्य र| भरे पड़े हैं। हम जितनी गहराई में जाएंगे, उतने ज्यादा मूल्यवान आभूषण मिलेंगे। भागवत का प्रवाह हजारों वर्षों से चला आ रहा है। इस ग्रंथ की विशेषता है कि प्राचीन होने के बाद भी नित नई अनुभूति होती है। ये विचार बुधवार को मरीमाता चौराहा स्थित दुर्गा काॅलोनी शिव मंदिर में चल रहे भागवत ज्ञानयज्ञ में पं. संतोष भार्गव ने व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कलियुग में हर व्यक्ति भौतिक चकाचौंध में फंसकर धर्म-संस्कृति से विमुख हो रहा है। ऐसे में भगवान का स्मरण ही सत्संग का श्रेष्ठ उपाय है। भागवत कथा स्वयं भगवान की वाणी है। आयोजन समिति की ओर से चंदू-ज्योति ठाकुर, सुनील ठाकुर, सुधीर सोनी आदि ने व्यासपीठ का पूजन किया।

आईना हमारा गुरु होता है : महाराज कौशल

कोई और आईना दिखाए, उससे पहले खुद देख लो। आईना हमारा गुरु होता है। जिस तरह गुरु बोलते नहीं बल्कि संकेत देते हैं, उसी तरह आईना बोलता नहीं, संकेत देता है। आईना तब देखें, जब आपकी चारों ओर जय-जयकार हो। तब यह देखें कि जो सम्मान मिल रहा है, क्या आप उसके काबिल हैं। यदि नहीं लगे, तो अपने कार्यों और कर्मों को और सुधारें। दो लोगों को हमेशा आईना देखना चाहिए- एक जो राजगद्दी पर बैठा हो और दूसरा जो विलास-गद्दी पर। यह बात संत विजय कौशल महाराज ने स्कीम 140 में चल रही राम कथा में बुधवार को कही। इस दौरान पर्यावरण बचाने की शपथ भी दिलाई गई।

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