राग की रोशनी में सुरीले सफर पर चल पड़े
बनारस घराने की छठी पीढ़ी के नुमाइंदे गायक रजनीश-रितेश मिश्र
पंडित किशन महाराज का वह आशीर्वाद नहींं भूल सकते
एक अनुभव साझा करते हुए उन्होंने का एक बार अकोला में हमारी संगीत सभा के बाद एक 70 साल के एक व्यक्ति मिलने आए। उन्होंने कहा कि मैं 50 सालों से हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत सुन रहा हूं लेकिन आपका गाना सुनकर पहली बार यह लगा कि मुझे भी गाना सीखना है। यही जीवन को सुरीला बनाता है। दूसरा अनुभव हमारे लिए अविस्मरणीय है। अहमदाबाद में हमारी संगीत सभा में पंडित किशन महाराज पीछे की विंग में बैठे हुए थे। हमने जैसे ही गाना खत्म किया वे मंच पर आए कहा कि मैंने एक बड़े तंत्रकारी के कलाकार के साथ रागेश्री बजाया। मैं संगत कर रहा था लेकिन इन दोनों जो रागेश्री गाया यह उन कलाकार से भी बेहतर था। पंडित किशन महाराज का यह आशीर्वाद हम कभी नहीं भूल सकते।
ख्यात गायक जोड़ी पंडित रजनीश-रितेश मिश्र ने सिटी भास्कर से बातचीत में अपने संगीत सफर के अनुभव साझा किए
interview
सिटी रिपोर्टर कॉलेज से निकलने के बाद हमने नौकरी करने कोशिशें की थी। लेकिन यह सब करते हुए हममें बनारस घराने का संगीत गूंजता रहता था। हमारे भीतर उस संगीत-परंपरा की अजस्र धारा बहती थी, राग की रोशनी फूटती थी। सुर की निष्कम्प लौ जलती रहती थी। उसी की रोशनी में हम इस सुरीले सफर पर निकल पड़े। यह कहना है युवा गायक जोड़ी पंडित रजनीश और रितेश मिश्र का। बनारस घराने की छठी पीढ़ी के ये नुमाइंदे बुधवार को प्रस्तुति देने इंदौर आए थे।
तभी से कर रहे हैं यह इबादत
ख्यात गायक-जोड़ी पंडित राजन-साजन मिश्र में से राजन मिश्र के इन दोनों बेटों ने सिटी भास्कर से बात की। उन्होंने कहा कि हमें संगीत विरासत में मिला है, और हम यह जिम्मेदारी महसूस करते हैं कि इस घराने की विरासत को आगे बढ़ाएं, परंपरा को आगे ले जाएं। इसीलिए हमने तय किया कि हम संगीत की इबादत करेंगे। बस, तभी से इस इबादत को पूरी शिद्दत, पूरे समर्पण के साथ निरंतर कर रहे हैं। संगीत में आने के फैसला पूरी तरह से हमारा अपना है।