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इंदौर चेस्ट सेंटर में टीबी विशेषज्ञ चिकित्सक ही नहीं

5 वर्ष पहले
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सीधी बात

डॉ. विजय अग्रवाल,
अधीक्षक, इंदौर चेस्ट सेंटर

महेंद्र तिवारी इंदौर

छाती और फेफड़ों की गंभीर बीमारियों के मरीजों को बेहतर सुविधा देने के लिए 2000 में स्वास्थ्य विभाग ने मनोरमा राजे क्षय चिकित्सालय (एमआरटीबी) के पास सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल इंदौर चेस्ट सेंटर बनाया था। यहां क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस, कॉर्डियक अस्थमा, पल्मोनरी एडिमा और प्लूरल इफ्यूजन जैसे छाती और फेफड़ों से संबंधित रोगों के इलाज के लिए अत्याधुनिक मशीनें भी लगाई गईं, पर विभाग ने इलाज करने वाले विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं की। यही वजह है, यह सेंटर अपनी पहचान नहीं बना सका।

विभाग ने यहां डॉक्टरों की नियुक्ति में कभी ध्यान नहीं रखा कि वे चेस्ट सेंटर में इलाज करने योग्य हैं या नहीं। एमआरटीबी और इंदौर चेस्ट सेंटर को मिलाकर पूरा अस्पताल 150 बेड का है। संचालनालय, स्वास्थ्य सेवाएं (डीएचएस) ने यहां अधीक्षक समेत चार डॉक्टरों की स्थापना की है। इनमें सुनील बागड़ी जहां पैथालॉजिस्ट हैं, वहीं कृष्णा दादू ईएनटी सर्जन हैं। माधवी सराफ एमबीबीएस हैं। चेस्ट सेंटर में डॉ. विजय अग्रवाल (डिप्लोमा इन ट्यूबरकुलोसिस एंड चेस्ट डिसीस-डीटीसीडी) ही एकमात्र टीबी विशेषज्ञ हैं, मगर अधीक्षक होने से उन पर प्रशासकीय जिम्मेदारियां भी हैं। यानी यहां टीबी का कोई विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं है। इसके चलते यहां मरीज एमवाय के रेसीडेंट मेडिकल ऑफिसर और डीटीसीडी कोर्स करने वाले स्टूडेंट के भरोसे ही रहते हैं।

इंदौर चेस्ट सेंटर का भवन।

एमडी डॉक्टर भी नहीं
विभाग की लापरवाही का आलम यह है कि अफसरों ने इंदौर चेस्ट सेंटर में अब तक एमडी डॉक्टर की नियुक्ति भी नहीं की। विभागीय सूत्रों की मानें तो एमडी डॉक्टर चेस्ट सेंटर में इलाज कर सकता है।

आने से डरते हैं मरीज
डॉक्टरों की कमी और मशीनों का इस्तेमाल नहीं होने से मरीजों के लिए चेस्ट सेंटर का औचित्य खत्म हो गया। टीबी के अलावा चेस्ट और फेफड़ों से संबंधित दूसरी समस्याएं होने पर मरीज निजी अस्पतालों में इलाज कराना बेहतर समझते हैं।

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