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देव कुण्डल

5 वर्ष पहले
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 डॉ. सोनाली-आलोक जैन से लोन राशि दिए बगैर ही तीन महीने ब्याज वसूला?

 हमारी गलती नहीं है। कुछ प्रोसेस नहीं हुई थी, इसलिए चेक रिलीज करने में थोड़ा टाइम लग गया। हमारी तरफ से देर नहीं होती है।

 चेक नहीं दिया तो फिर तीन महीने तक ब्याज क्यों लिया गया?

 नियमानुसार चेक प्रिंट होने के दिन से ब्याज की गणना शुरू हो जाती है। किसी कारणवश चेक देने में देरी होने पर हम कुछ नहीं कर सकते।

 आरोप है, जानबूझकर गलत अकाउंट का चेक बना दिया?

 हमें जो खाता नंबर दिया था उसी का चेक बनाया था। बाद में बिल
देव कुण्डल इंदौर

बायपास पर सिल्वर स्प्रिंग टाउनशिप में मकान खरीदने के लिए डॉ. सोनाली-आलोक जैन ने एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लि. की तुकोगंज ब्रांच से 13 लाख 48 हजार रुपए फाइनेंस करवाए थे। जैन दंपति का लोन अक्टूबर 2015 में मंजूर हुआ था। टाउनशिप बनाने वाली कंपनी सिल्वर रियालिटीज एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर के नाम से एलआईसी एचएफएल ने 28 अक्टूबर को चेक प्रिंट कर दिया। चेक क्रमांक 836409 के मुताबिक डॉ. जैन को 13 लाख 48 हजार 652 रुपए भुगतान होना था, जो उन्हें अगले तीन महीने तक नहीं मिला।

रुपए दिए बगैर ब्याज वसूला

लोन मंजूर होने पर जैन दंपति ने चेक के लिए एलआईसी एचएफएल प्रबंधकों से कई बार गुहार लगाई, पर हर बार उन्हें टाल दिया गया। फाइनेंस कंपनी चेक प्रिंट होते ही ब्याज की गणना शुरू कर देती है। इसके चलते जैन दंपति से लोन अमाउंट दिए बिना ही अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर का प्रतिमाह 30 हजार रुपए ब्याज वसूल लिया गया, जबकि चेक उन्हें 12 जनवरी 2016 को सौंपा गया।

जानबूझकर किया परेशान

कर्जदार आलोक जैन ने बताया, अकाउंट नंबर की लिखित जानकारी देने पर भी एलआईसी एचएफएल ने जानबूझकर गलत अकाउंट के नाम से चेक बनाया और फिर नए अकाउंट के नामे चेक बनाने में तीन महीने लगा दिए। गलती एलआईसी एचएफएल की थी, पर तीन महीने का 90 हजार रुपए ब्याज उन्हें देना पड़ा। उधर बिल्डर को 10 हजार रुपए प्रति महीने की लेट फीस चुकाना पड़ी। रजिस्ट्री होने पर भी लोन का चेक नहीं होने से उन्हें स्वामित्व के लिए तरसना पड़ा। जैन दंपति को लगातार दफ्तरों के चक्कर काटने पड़े। जबरन वसूली गई राशि लौटाने के लिए भी आवेदन दिए, पर कार्रवाई नहीं हुई।

डॉ. सोनाली और आलोक जैन के बैंक स्टेटमेंट से साफ है कि अक्टूबर से दिसंबर 2015 तक एलआईसी एचएफएल ने ब्याज वसूला।

करोड़ों का गोरखधंधा
डीबी स्टार को कई लोगों ने नाम न छापने के अनुरोध पर बताया, विभिन्न फाइनेंस कंपनियों ने उनके साथ भी कमोबेश कुछ ऐसा ही सलूक किया। लोन मंजूर होने के बाद किसी को एक महीने तो किसी को छह महीने तक चेक नहीं दिए गए, जबकि ब्याज का मीटर चलता रहा। जैन ने कहा, हाउसिंग फाइनेंस करने वाली अधिकांश बैंकें ऐसे ही ठगी कर करोड़ों रुपए कमाती हैं। राशि अटकने के डर से लोग खुलकर सामने नहीं आ पाते हैं। लोगों की इसी मजबूरी का फायदा उठाया जाता है।

एलआईसी एचएफएल की लापरवाही
सितंबर में ही एलआईसी एचएफएल को लिखित में नए खाते की सूचना दे दी थी, फिर भी पुराने बंद खाते के नाम से चेक बना दिया। कई चक्कर काटने पर तीन महीने बाद दोबारा नया चेक दिया। कुछ अन्य लोगों के चेक भी ऐसे ही अटके हैं।  आशीष सोनी, पीआरओ, सिल्वर रियालिटीज एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर

ये तो सरासर ठगी है, जबरन वसूला ब्याज

एलआईसी एचएफएल ने हमें लोन अमाउंट देने में परेशान किया और बिना रुपए दिए तीन माह ब्याज वसूला, यह सरासर ठगी है। गलती एलआईसी एचएफएल की थी और सजा हमने भुगती। तीन माह की जबरन वसूली गई ब्याज की राशि भी वापस नहीं की जा रही है।  डॉ. सोनाली-आलोक जैन, पीड़ित

DB STAR Expose
सीधी बात केविन सोनी, पीआरओ, एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस

हां, चेक प्रिंट होते ही ब्याज हो जाता है शुरू
लोन मिलने से पहले ब्याज का लगान
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